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भारत के आठ राज्यों का स्थापना दिवस: एक ऐतिहासिक यात्रा

आज, 1 नवंबर को, भारत के आठ राज्यों का स्थापना दिवस मनाया जा रहा है। यह दिन विभिन्न राज्यों के गठन की ऐतिहासिक यात्रा को दर्शाता है, जिसमें भाषा और सांस्कृतिक पहचान के आधार पर नए राज्यों की मांग शामिल है। जानें कैसे 1956 में राज्य पुनर्गठन अधिनियम ने भारत के नक्शे को बदल दिया और इन राज्यों का गठन हुआ। इस लेख में हम इन राज्यों के गठन की कहानी और उनके पीछे के कारणों पर चर्चा करेंगे।
 

भारत के आठ राज्यों का स्थापना दिवस

आज, 1 नवंबर को, भारत के आठ विभिन्न राज्यों का स्थापना दिवस मनाया जा रहा है। इन राज्यों में दक्षिण से लेकर उत्तर तक के क्षेत्र शामिल हैं। दक्षिण भारत के आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, केरल और तमिलनाडु के साथ-साथ उत्तर भारत के मध्य प्रदेश, पंजाब, हरियाणा और छत्तीसगढ़ भी इस अवसर को मनाने के लिए तैयार हैं। हालांकि, इन राज्यों का गठन अलग-अलग वर्षों में हुआ, लेकिन स्थापना की तारीख एक समान है। कुछ राज्यों का गठन भाषा के आधार पर हुआ, जबकि अन्य का गठन क्षेत्रीय मांगों के चलते हुआ। 1956 में राज्य पुनर्गठन अधिनियम लागू होने के बाद देश के नक्शे में महत्वपूर्ण परिवर्तन आया।


राज्य पुनर्गठन का इतिहास

भारत ने पहले अंग्रेजों के खिलाफ अपनी पहचान के लिए संघर्ष किया। स्वतंत्रता के बाद, विभिन्न राज्यों में भाषा और सांस्कृतिक पहचान के आधार पर नए राज्यों की मांग उठने लगी। लोग अपनी भाषा के माध्यम से सांस्कृतिक पहचान की खोज कर रहे थे। जब सरकार ने इन मांगों पर ध्यान नहीं दिया, तो विरोध बढ़ने लगा। 1 नवंबर 1956 को भारत सरकार ने राज्य पुनर्गठन अधिनियम लागू किया, जिसके बाद भारत का नक्शा और राज्यों की सीमाएं स्थायी रूप से बदल गईं। इन आठ राज्यों का गठन तीन अलग-अलग वर्षों में हुआ: 1956, 1966 और 2000।


1956 में पहला बदलाव

भाषा के आधार पर राज्य की मांग का पहला उदाहरण दक्षिण भारत के आंध्र क्षेत्र में देखा गया। उस समय का आंध्र प्रदेश मद्रास और हैदराबाद राज्यों के तेलुगु भाषी क्षेत्रों में विभाजित था। तेलुगु बोलने वाले लोग अपनी अलग पहचान और राज्य की मांग कर रहे थे। इस मांग को लेकर पोट्टी श्रीरामुलु ने आमरण अनशन किया, जो 58 दिनों तक चला। उनकी मृत्यु के बाद आंदोलन तेज हुआ और 1 अक्टूबर 1953 को आंध्र राज्य का गठन हुआ। 1 नवंबर 1956 को हैदराबाद राज्य के तेलुगु भाषी क्षेत्रों को मिलाकर आंध्र प्रदेश का गठन किया गया।


तमिलनाडु और केरल का गठन

तमिलनाडु का गठन भी 1 नवंबर 1956 को मद्रास राज्य के रूप में हुआ। राज्य पुनर्गठन के दौरान तमिल भाषी क्षेत्रों को मिलाकर इसका स्वरूप तय किया गया। बाद में, 18 जुलाई 1967 को मद्रास राज्य का नाम बदलकर तमिलनाडु करने का प्रस्ताव पारित हुआ। 14 जनवरी 1969 से यह नाम आधिकारिक रूप से लागू हुआ।


केरल पहले त्रावणकोर, कोचीन और मद्रास प्रेसीडेंसी के मालाबार क्षेत्र में बंटा हुआ था। 1 जुलाई 1949 को त्रावणकोर और कोचीन का विलय कर त्रावणकोर-कोचीन राज्य बनाया गया। इसके बाद मलयालम भाषी लोगों ने भाषा के आधार पर अलग राज्य बनाने की मांग की, जिसे ऐक्य केरल आंदोलन कहा गया। 1 नवंबर 1956 को त्रावणकोर-कोचीन और मालाबार क्षेत्र को मिलाकर केरल का गठन हुआ।


कर्नाटक और मध्य प्रदेश का गठन

कर्नाटक का गठन कई प्रशासनिक इकाइयों में बंटे मैसूर रियासत, बॉम्बे राज्य, मद्रास राज्य, हैदराबाद राज्य और कूर्ग को मिलाकर किया गया। कन्नड़ भाषी क्षेत्रों को एक राज्य में लाने के लिए 19वीं सदी के अंत में आंदोलन शुरू हुआ। 1 नवंबर 1956 को इन क्षेत्रों को मिलाकर मैसूर राज्य का गठन हुआ, जिसका नाम 1 नवंबर 1973 को बदलकर कर्नाटक कर दिया गया।


मध्य प्रदेश का गठन प्रशासनिक सुविधा के लिए किया गया था। 1 नवंबर 1956 को राज्य पुनर्गठन अधिनियम के तहत मध्य प्रदेश का गठन हुआ। इससे पहले, यह क्षेत्र पांच प्रशासनिक इकाइयों में बंटा हुआ था।


पंजाब और हरियाणा का विभाजन

पंजाब और हरियाणा पहले अविभाजित पंजाब का हिस्सा थे। हरियाणा के हिंदी भाषी क्षेत्रों को अलग राज्य बनाने की मांग उठी। पंजाबी भाषी लोगों के लिए अलग पंजाब की मांग को लेकर आंदोलन तेज हुआ, जिसे पंजाबी सूबा आंदोलन कहा गया। 1 नवंबर 1966 को हरियाणा अलग राज्य बना और पंजाब को नया स्वरूप मिला।


छत्तीसगढ़ का गठन

छत्तीसगढ़ का गठन क्षेत्रीय पहचान और विकास के मुद्दों के चलते हुआ। यहां के लोगों का मानना था कि अलग राज्य बनने से विकास की योजनाएं बेहतर तरीके से बनाई जा सकेंगी। 1 नवंबर 2000 को छत्तीसगढ़ का गठन मध्य प्रदेश पुनर्गठन अधिनियम के तहत हुआ।