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भारत के परमाणु परीक्षण: एक गुप्त मिशन की कहानी

1998 में भारत के पोखरण में हुए परमाणु परीक्षण ने दुनिया को चौंका दिया। अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार ने इस मिशन को इतनी गोपनीयता से चलाया कि अमेरिका की खुफिया एजेंसियां भी इसे पकड़ने में असफल रहीं। जानें इस गुप्त मिशन की पूरी कहानी, जिसमें वैज्ञानिकों ने सैनिकों के भेष में काम किया और अमेरिकी सैटलाइट्स को भ्रमित करने के लिए रणनीतियाँ बनाई गईं।
 

भारत के परमाणु इतिहास में महत्वपूर्ण दिन


नई दिल्ली: 11 और 13 मई 1998 की तारीखें भारत के परमाणु इतिहास में विशेष महत्व रखती हैं। उस समय अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार थी, जिसने राजस्थान के पोखरण में दूसरा परमाणु परीक्षण किया, जिससे दुनिया चकित रह गई। यह उल्लेखनीय था कि अमेरिका और उसकी खुफिया एजेंसी CIA को इस योजना की भनक तक नहीं लगी। भारत ने इस परीक्षण की योजना इतनी गोपनीयता से बनाई थी कि परीक्षण के बाद अमेरिका ने अपनी खुफिया विफलता पर सवाल उठाना शुरू कर दिया था।


चीन के बाद भारत में परमाणु शक्ति की मांग

चीन ने 1964 में परमाणु शक्ति हासिल कर ली थी, जिसके बाद भारत में भी न्यूक्लियर शक्ति की आवश्यकता महसूस की गई। अटल बिहारी वाजपेयी ने कहा था कि परमाणु बम का जवाब केवल परमाणु बम ही हो सकता है। 1998 में प्रधानमंत्री बनने के बाद उन्होंने इसी विचार को आगे बढ़ाया। हालांकि, भारत ने 1974 में पहला परमाणु परीक्षण किया था, लेकिन उस समय वैश्विक निगरानी इतनी सख्त नहीं थी। पोखरण-2 के समय स्थिति पूरी तरह बदल चुकी थी।


गुप्त रखा गया परमाणु मिशन

भारत ने 1995-96 में दूसरा न्यूक्लियर परीक्षण करने की योजना बनाई थी, लेकिन इसकी जानकारी अमेरिका तक पहुँच गई थी। अमेरिकी दबाव के कारण उस समय कार्यक्रम को रोकना पड़ा। इस घटना से सबक लेते हुए वाजपेयी सरकार ने 1998 में पूरे मिशन को गुप्त रखने का निर्णय लिया। इस दौरान अमेरिकी सैटलाइट्स लगातार पोखरण पर नजर रखे हुए थे, इसलिए वैज्ञानिकों और सेना ने ऐसी रणनीति बनाई कि किसी भी गतिविधि की जानकारी बाहर न जा सके।


सैनिकों की यूनिफॉर्म में वैज्ञानिक

तत्कालीन DRDO प्रमुख एपीजे अब्दुल कलाम को 'मेजर जनरल पृथ्वीराज' और वैज्ञानिक राजगोपाल चिदंबरम को 'नटराज' कोड नाम दिया गया था। वैज्ञानिकों को सैनिकों के भेष में पोखरण भेजा गया ताकि किसी को संदेह न हो। इस पूरे मिशन के दौरान रात में काम किया जाता था और सुबह होते ही इलाके को पहले जैसा बना दिया जाता था। यहां तक कि रेगिस्तान की रेत को भी प्राकृतिक रूप में लाने की कोशिश की जाती थी ताकि अमेरिकी सैटलाइट्स को कुछ भी असामान्य न दिखे।


अमेरिकी सैटलाइट को भ्रमित करने की रणनीति

भारतीय सेना की 58वीं इंजीनियर रेजिमेंट को अमेरिकी सैटलाइट्स को भ्रमित करने का कार्य सौंपा गया था। परीक्षण से जुड़ी अधिकांश गतिविधियाँ भूमिगत सुरंगों में की गईं। 11 मई 1998 को भारत ने पोखरण में लगातार तीन परमाणु परीक्षण किए। इसके बाद प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने इसकी घोषणा की। अमेरिका इस खबर से चकित रह गया क्योंकि उसकी खुफिया एजेंसियां इस मिशन को पकड़ने में असफल रही थीं।