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भारत के पूर्व मंत्रियों ने पश्चिम एशिया में संघर्ष पर सरकार का समर्थन किया

पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष के बीच, भारत के पूर्व केंद्रीय मंत्रियों ने सरकार के कदमों का समर्थन किया है। कमलनाथ, आनंद शर्मा और शशि थरूर ने कूटनीतिक पहल की सराहना की और रसोई गैस के संकट पर स्थिति को स्पष्ट किया। जानें उनके विचार और इस मुद्दे पर उनकी प्रतिक्रियाएँ।
 

भारत सरकार के समर्थन में पूर्व केंद्रीय मंत्रियों की आवाज

नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष के संदर्भ में, भले ही राहुल गांधी भारत सरकार की नीति की आलोचना कर रहे हों और ऊर्जा संकट पर सवाल उठा रहे हों, लेकिन उनकी पार्टी के तीन प्रमुख नेताओं ने सरकार के कदमों का समर्थन किया है। पूर्व केंद्रीय मंत्रियों कमलनाथ, आनंद शर्मा और शशि थरूर ने इस मुद्दे पर सरकार के उठाए गए कदमों की सराहना की है।


पूर्व केंद्रीय मंत्री आनंद शर्मा ने भारत की कूटनीतिक पहल की प्रशंसा करते हुए इसे परिपक्व और कुशल बताया। मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने रसोई गैस के संकट पर कहा कि देश में कोई कमी नहीं है, बल्कि एक माहौल बनाया जा रहा है। इससे पहले, शशि थरूर ने एक अंग्रेजी समाचार पत्र में लेख लिखकर केंद्र सरकार की कूटनीतिक स्थिति की सराहना की थी और इसे समय के अनुकूल बताया था।


आनंद शर्मा ने दो अप्रैल को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, 'भारत का कूटनीतिक दृष्टिकोण संकट से निपटने में समझदारी भरा रहा है। इससे संभावित कठिनाइयों से बचा गया है। सरकार ने एक अप्रत्याशित और अस्थिर स्थिति में राजनीतिक नेताओं को नीतिगत निर्णयों के बारे में बताने के लिए एक सर्वदलीय बैठक भी आयोजित की।' उन्होंने यह भी कहा कि यह राष्ट्रीय संवाद जारी रहना चाहिए।


इसी प्रकार, रसोई गैस के सिलेंडर की कमी की कई रिपोर्टों के बीच, कमलनाथ ने छिंदवाड़ा में कहा, 'ऐसी कोई कमी नहीं है। यह केवल एक माहौल बनाया जा रहा है कि कमी है।' उन्होंने कुछ लोगों पर राजनीतिक लाभ के लिए जानबूझकर पैनिक पैदा करने का आरोप लगाया। उनके इस बयान पर केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा कि कांग्रेस के नेता खुद मान रहे हैं कि देश में पेट्रोल, डीजल और गैस की कमी नहीं है।