भारत के राज्यों का कर्ज: बढ़ती वित्तीय चुनौतियाँ
कर्ज की स्थिति
भारत की केंद्र और राज्य सरकारें भारी वित्तीय दबाव में हैं। हर वर्ष बड़े ब्याज का भुगतान करने के बावजूद, कर्ज में लगातार वृद्धि हो रही है। कई राज्यों में खर्च, आय से अधिक है, जिसके कारण उन्हें या तो केंद्र सरकार से सहायता लेनी पड़ती है या फिर कर्ज लेना पड़ता है। हाल ही में संसद में पूछे गए सवालों के जवाब में यह स्पष्ट हुआ है कि भारत का कोई भी राज्य ऐसा नहीं है जिसने कर्ज न लिया हो। कई राज्यों का कर्ज अब उनके कुल बजट से भी अधिक हो गया है, जिसमें आर्थिक रूप से मजबूत और कमजोर दोनों प्रकार के राज्य शामिल हैं.
केंद्र सरकार का कर्ज
केंद्र सरकार ने 2024-25 में 11.16 लाख करोड़ रुपये का ब्याज चुकाया, जबकि उस समय भारत का कुल कर्ज 185.95 लाख करोड़ रुपये था। 2025-26 में यह कर्ज 201.17 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो गया है। इसके परिणामस्वरूप, भारत का राजकोषीय घाटा 15.19 प्रतिशत तक पहुंच गया है, जो दर्शाता है कि सरकार की आय, खर्च से 15.19 प्रतिशत अधिक है.
राज्यों के कर्ज का विश्लेषण
कांग्रेस के राज्यसभा सांसद विवेक तन्खा ने राज्यों के कर्ज से संबंधित सवाल उठाया था, जिसका जवाब वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने 28 जुलाई को दिया। उनके द्वारा प्रस्तुत आंकड़े मार्च 2026 तक के हैं और यह RBI की रिपोर्ट पर आधारित हैं।
राज्यों के कर्ज का हाल
अगर कर्ज के मामले में राज्यों की सूची बनाई जाए, तो शीर्ष 10 राज्यों का कुल कर्ज 66.28 लाख करोड़ रुपये है। 2026-27 के लिए भारत सरकार का बजट 53.47 लाख करोड़ रुपये था, जिसमें लगभग 36.5 लाख करोड़ रुपये की आय का अनुमान था। यह दर्शाता है कि सरकारें कर्ज लेने में कितनी आगे हैं।
चुनावी राज्यों की स्थिति
इस वर्ष चार राज्यों में विधानसभा चुनाव हुए। चुनावी वर्ष में सरकारें अक्सर लोकलुभावन योजनाओं पर खर्च करती हैं, जिसके लिए उन्हें कर्ज लेना पड़ता है। पश्चिम बंगाल, केरल, असम और तमिलनाडु के आंकड़े बताते हैं कि 2024 में तमिलनाडु का कर्ज 8,43,532 करोड़ रुपये था, जो 2025 में बढ़कर 9,38,358 करोड़ रुपये हो गया।
बजट से अधिक कर्ज
विश्लेषण से यह भी स्पष्ट होता है कि कई राज्यों का कर्ज अब उनके कुल बजट से अधिक हो चुका है। उदाहरण के लिए, हिमाचल प्रदेश का बजट 54,928 करोड़ रुपये है, जबकि उसका कर्ज 1,01,241 करोड़ रुपये है। इसी तरह, पंजाब का कर्ज 3.79 लाख करोड़ रुपये है, जबकि उसका बजट 2.60 लाख करोड़ रुपये है.
आंकड़े