भारत के राज्यों की वित्तीय स्थिति पर CAG की चिंताजनक रिपोर्ट
राजकोषीय घाटे का बढ़ता संकट
हाल ही में भारत के नियंत्रक और महालेखा परीक्षक (CAG) द्वारा जारी की गई एक रिपोर्ट ने चिंताजनक आंकड़े प्रस्तुत किए हैं। इस रिपोर्ट में बताया गया है कि सभी राज्यों को राजकोषीय घाटे का सामना करना पड़ रहा है, जिसका अर्थ है कि उनकी आय उनके खर्च से कम है। इसके परिणामस्वरूप, 28 राज्यों का कुल कर्ज अब 90.51 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। सबसे चिंताजनक यह है कि 15 राज्यों की आय भी घाटे में है। CAG की रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि राज्यों की आय में कमी आ रही है, जबकि खर्च में वृद्धि हो रही है, जिससे वे अपनी योजनाओं को चलाने के लिए लगातार कर्ज ले रहे हैं।
CAG की रिपोर्ट का सारांश
भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक के. संजय मूर्ति ने मंगलवार को 'राज्य वित्त 2024-25 रिपोर्ट' जारी की। रिपोर्ट के अनुसार, 18 राज्यों ने राजस्व अधिशेष का लक्ष्य रखा था, जबकि तीन राज्यों ने राजस्व घाटे का सामना किया। 15 राज्यों ने राजस्व घाटे में रहने के बावजूद, 13 राज्यों ने राजस्व अधिशेष प्राप्त किया। राजस्व अधिशेष का मतलब है कि इन राज्यों की आय खर्च से अधिक रही।
राजस्व घाटे का सामना करने वाले राज्य
उत्तर प्रदेश, गुजरात, झारखंड, मणिपुर और अन्य राज्यों ने 2024-25 में राजस्व अधिशेष दर्ज किया, जबकि 15 राज्यों को राजस्व घाटे का सामना करना पड़ा। इसका मतलब है कि 13 राज्यों की आय में कमी आई और 15 राज्यों ने अधिक खर्च किया। आमतौर पर, यह अतिरिक्त खर्च कर्ज के रूप में आता है, जो राज्य की आर्थिक स्थिति को प्रभावित करता है।
किसका घाटा, किसको फायदा?
CAG की रिपोर्ट के अनुसार, 2024-25 में असम, बिहार, छत्तीसगढ़, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, कर्नाटक, महाराष्ट्र, मिजोरम और तेलंगाना राजस्व घाटे में रहे। सात राज्यों ने जीरो राजस्व घाटे का लक्ष्य रखा था, जिनमें गोवा, झारखंड, त्रिपुरा और उत्तर प्रदेश शामिल हैं। इनमें से गोवा, झारखंड, त्रिपुरा और उत्तर प्रदेश ने अपने लक्ष्य को हासिल किया, जबकि पंजाब, राजस्थान और तमिलनाडु घाटे में रहे।
CAG की टिप्पणी
रिपोर्ट जारी करते हुए CAG के संजय मूर्ति ने कहा, 'मुझे उम्मीद है कि यह रिपोर्ट सरकारों, शोधकर्ताओं, नीति-निर्माताओं और नागरिकों के लिए एक उपयोगी संसाधन साबित होगी। इससे राज्यों की वित्तीय स्थिति को बेहतर ढंग से समझने और सही जानकारी के आधार पर वित्तीय निर्णय लेने में मदद मिलेगी।' रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि राज्यों की टैक्स से होने वाली आय का महत्व बढ़ा है।
कर्ज की स्थिति
रिपोर्ट में कहा गया है कि 21 मार्च 2025 तक 28 राज्यों का कुल कर्ज 90.51 लाख करोड़ रुपये था। सभी राज्यों में राजकोषीय घाटा दर्ज किया गया है, जिसका अर्थ है कि वे अपनी आय से अधिक खर्च कर रहे हैं। 2015-16 से 2024-25 के बीच, राज्य राजस्व और राजकोषीय घाटे में बने रहे। कोविड-19 महामारी के कारण 2020-21 में राजस्व घाटे में वृद्धि देखी गई।
राजस्व खर्च का विवरण
रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि वित्त वर्ष 2024-25 में सभी राज्यों का कुल बजट खर्च 51.20 लाख करोड़ रुपये रहा, जो उनके संयुक्त जीएसडीपी का 15.78 प्रतिशत है। सैलरी, पेंशन और ब्याज भुगतान जैसे मदों पर खर्च का बड़ा हिस्सा बना हुआ है।