भारत के लिए ओमान और ईयू के साथ व्यापार समझौते की महत्वपूर्ण भूमिका
ओमान और ईयू से व्यापार समझौते की प्रगति
ओमान से हाल ही में हुआ द्विपक्षीय व्यापार समझौता, ईयू के साथ जल्द एफटीए पर हस्ताक्षर की उम्मीद
Business News Update, बिजनेस डेस्क : पिछले वर्ष भारत समेत विश्व के कई देशों के लिए आर्थिक चुनौतियों से भरा रहा। अमेरिका ने अपनी नई टैरिफ नीति के तहत भारत पर 50 प्रतिशत टैरिफ लगाया, जिससे भारतीय निर्यात को भारी नुकसान हुआ। अमेरिका ने भारत पर टैरिफ बढ़ाने की चेतावनी भी दी है।
हालांकि, भारत ने इस स्थिति से निपटने के लिए त्वरित कदम उठाए। सरकार ने जीएसटी सुधारों को लागू किया और कई वर्षों से लम्बित व्यापारिक समझौतों को तेजी से पूरा किया। इनमें ओमान के साथ हुआ समझौता और यूरोपीय संघ के साथ संभावित समझौता शामिल हैं।
ओमान: भारत का नया व्यापार केंद्र
ओमान एक उभरता हुआ मैन्युफैक्चरिंग और ट्रेडिंग हब बन रहा है, जो अफ्रीका और जीसीसी देशों के लिए एक महत्वपूर्ण गेटवे के रूप में देखा जा रहा है। इससे भारतीय निर्माताओं के लिए नए बाजारों के अवसर उत्पन्न हो रहे हैं, खासकर पॉलिश किए गए हीरे और सोने के आभूषणों में।
ईयू के साथ समझौते पर वार्ता का महत्व
भारत की प्राथमिकता में यूरोपीय संघ के साथ द्विपक्षीय व्यापार समझौता शामिल है। केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने हाल ही में ब्रसेल्स में उच्चस्तरीय वार्ता की, जिसमें लंबित मुद्दों को सुलझाने और समझौते को आगे बढ़ाने पर चर्चा की गई।
अमेरिका के साथ व्यापार वार्ता जारी
अमेरिका में टैरिफ बढ़ने के कारण भारतीय निर्यात में 30 प्रतिशत से अधिक की कमी आई है। अमेरिका और चीन के बीच की अनिश्चितता के बावजूद, भारत अमेरिका के बाजार को खोना नहीं चाहता। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में व्यापार वार्ता को आगे बढ़ाने की उम्मीद है।