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भारत के लिए राहत: शिवालिक टैंकर ने खतरनाक समुद्री रास्ता पार किया

पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच, भारत के लिए राहत की खबर आई है। भारतीय ध्वज वाला एलपीजी टैंकर, शिवालिक, सुरक्षित रूप से खतरनाक समुद्री मार्ग को पार कर भारत की ओर बढ़ रहा है। इस टैंकर के आने से एलपीजी की आपूर्ति में सुधार की उम्मीद है। इसके अलावा, एक और टैंकर 'जग लाडकी' भी कच्चा तेल लेकर भारत के लिए रवाना हुआ है। सरकार स्थिति पर नजर रखे हुए है और ऊर्जा आपूर्ति को स्थिर रखने के लिए प्रयासरत है।
 

नई दिल्ली में ऊर्जा आपूर्ति की स्थिति में सुधार


नई दिल्ली: पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच भारत को एक सकारात्मक समाचार मिला है। ऊर्जा की आपूर्ति को लेकर चिंताओं के बीच, भारतीय ध्वज वाला एलपीजी टैंकर, शिवालिक एलपीजी कैरियर, सुरक्षित रूप से खतरनाक समुद्री मार्ग को पार कर भारत की ओर बढ़ चुका है और कुछ घंटों में गुजरात के मुंद्रा बंदरगाह पर पहुंचने की उम्मीद है। इस जहाज के सुरक्षित आगमन से देश में एलपीजी की आपूर्ति में सुधार की संभावना जताई जा रही है।


एलपीजी टैंकर की जानकारी

शिवालिक एलपीजी कैरियर में 45,000 मीट्रिक टन से अधिक एलपीजी भरी हुई है। यह जहाज युद्ध प्रभावित स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से सुरक्षित निकलकर भारत की ओर रवाना हुआ था। हाल के दिनों में इस समुद्री मार्ग से गुजरना चुनौतीपूर्ण हो गया था, क्योंकि क्षेत्र में बढ़ते सैन्य तनाव के कारण कई जहाजों की आवाजाही प्रभावित हुई थी। इस जहाज के मुंद्रा बंदरगाह पहुंचने से घरेलू बाजार में एलपीजी की उपलब्धता में सुधार की उम्मीद है। सरकार भी स्थिति पर नजर बनाए हुए है ताकि ऊर्जा आपूर्ति में कोई बाधा न आए।


दूसरे भारतीय जहाज की जानकारी

दूसरा भारतीय जहाज भी पहुंचने वाला


सरकारी सूत्रों के अनुसार, कूटनीतिक प्रयासों के बाद दो भारतीय एलपीजी जहाजों को संघर्ष प्रभावित क्षेत्र से निकलने की अनुमति मिली थी। इनमें से पहला जहाज 'शिवालिक' मुंद्रा पोर्ट पर पहुंचने वाला है, जबकि दूसरा जहाज 'नंदा देवी' 17 मार्च को कांडला बंदरगाह पहुंचने की संभावना है। इन दोनों जहाजों के आगमन से एलपीजी आपूर्ति को स्थिर रखने में मदद मिल सकती है।


कच्चे तेल का टैंकर भी रवाना

कच्चे तेल से भरा एक और टैंकर भारत के लिए रवाना


इस बीच, एक और भारतीय ध्वज वाला तेल टैंकर 'जग लाडकी' संयुक्त अरब अमीरात के फुजैराह बंदरगाह से लगभग 80,800 टन कच्चा तेल लेकर भारत के लिए रवाना हुआ है। इसके अलावा, 'जग प्रकाश' नाम का एक अन्य भारतीय टैंकर भी पहले ही होर्मुज स्ट्रेट को पार कर चुका है। यह जहाज ओमान के सोहर बंदरगाह से पेट्रोल लेकर तंजानिया के टांगा बंदरगाह की ओर जा रहा है और इसके 21 मार्च तक वहां पहुंचने की उम्मीद है।


फारस की खाड़ी में भारतीय जहाजों की स्थिति

फारस की खाड़ी में अभी भी मौजूद हैं कई भारतीय जहाज


सरकार के अनुसार, फिलहाल फारस की खाड़ी के पश्चिमी हिस्से में 22 भारतीय ध्वज वाले जहाज मौजूद हैं, जिन पर कुल 611 भारतीय नाविक काम कर रहे हैं। सरकार इन जहाजों और नाविकों की सुरक्षा पर लगातार नजर रख रही है और स्थिति पर करीबी निगरानी बनाए हुए है।


ऊर्जा आपूर्ति पर तनाव का प्रभाव

ऊर्जा आपूर्ति पर तनाव का असर


पश्चिम एशिया में बढ़ते संघर्ष का असर ऊर्जा आपूर्ति पर भी पड़ा है। भारत अपनी जरूरत का लगभग 88 प्रतिशत कच्चा तेल, 50 प्रतिशत प्राकृतिक गैस और लगभग 60 प्रतिशत एलपीजी आयात करता है। इससे पहले भारत की ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात जैसे पश्चिम एशियाई देशों से आता रहा है। हालांकि, क्षेत्र में बढ़ते तनाव और होर्मुज स्ट्रेट में जोखिम बढ़ने के कारण आपूर्ति प्रभावित हुई है। इस स्थिति से निपटने के लिए भारत ने रूस सहित अन्य देशों से तेल खरीदकर आपूर्ति को संतुलित करने की कोशिश की है।


औद्योगिक और व्यावसायिक उपभोक्ताओं पर असर

औद्योगिक और व्यावसायिक उपभोक्ताओं पर असर


ऊर्जा आपूर्ति में आई बाधा के चलते प्राकृतिक गैस की आपूर्ति औद्योगिक इकाइयों के लिए सीमित कर दी गई है। इसके साथ ही होटल, रेस्तरां और अन्य व्यावसायिक संस्थानों को मिलने वाली एलपीजी की मात्रा में भी कमी की गई है। फिलहाल सरकार का ध्यान समुद्री व्यापार को सुरक्षित बनाए रखने और ऊर्जा आपूर्ति को स्थिर रखने पर है। ऐसे में शिवालिक और नंदा देवी जैसे जहाजों का सुरक्षित भारत पहुंचना देश के लिए राहत की खबर माना जा रहा है।