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भारत के लिए राहत: होर्मुज जलडमरूमध्य से एलपीजी टैंकर की अनुमति मिली

भारत को होर्मुज जलडमरूमध्य से एलपीजी टैंकर 'ग्रीन आशा' की अनुमति मिलने से घरेलू गैस की कमी को दूर करने की उम्मीद जगी है। इस बीच, डोनाल्ड ट्रंप की चेतावनी ने स्थिति को और गंभीर बना दिया है। जानें इस महत्वपूर्ण घटनाक्रम के बारे में।
 

नई दिल्ली में राहत की खबर


नई दिल्ली: देश में रसोई गैस की बढ़ती कमी के बीच एक सकारात्मक समाचार आया है। ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच चल रहे गंभीर सैन्य संघर्ष के बावजूद, भारत के 9वें टैंकर 'ग्रीन आशा' को होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने की अनुमति मिल गई है। यह भारतीय झंडे वाला जहाज बड़ी मात्रा में एलपीजी लेकर भारत के लिए रवाना हो चुका है, जिससे घरेलू बाजार में गैस की कमी को दूर करने की उम्मीद जगी है।


अन्य टैंकरों की स्थिति

शिपिंग क्षेत्र से मिली जानकारी के अनुसार, भारत का एक अन्य टैंकर 'जग विक्रम' अभी भी अनुमति का इंतजार कर रहा है। सुरक्षा कारणों से ये टैंकर होर्मुज पहुंचने से पहले रुक जाते हैं और मंजूरी मिलने के बाद ही आगे बढ़ते हैं। राहत की बात यह है कि ईरान ने स्पष्ट किया है कि वह कच्चे तेल और एलपीजी वाले जहाजों को प्राथमिकता दे रहा है। ईरान के कड़े रुख के बावजूद, भारत के प्रति उसका दृष्टिकोण नरम बना हुआ है, जबकि अमेरिका और इजरायल के सहयोगियों के लिए यह जलमार्ग बंद कर दिया गया है।


कूटनीतिक संकट

फंसे हुए जहाजों और नाविकों का संकट


शिपिंग महानिदेशालय की रिपोर्ट के अनुसार, लगभग 16 भारतीय जहाज होर्मुज के पास फंसे हुए हैं, जिनमें से 5 शिपिंग कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया के हैं। इस क्षेत्र में भारत के लगभग 20,500 नाविक मौजूद हैं, जिनकी सुरक्षा को लेकर सरकार सतर्क है। भारत लगातार ईरान के साथ उच्च स्तरीय कूटनीतिक वार्ता कर रहा है। इसी कूटनीति का परिणाम है कि 3 अप्रैल को 'ग्रीन सांवी' के जरिए 46 हजार टन एलपीजी की खेप भारत की ओर रवाना की जा सकी थी और हाल ही में 'BW TYR' टैंकर सुरक्षित मुंबई पहुंचा है।


डोनाल्ड ट्रंप की चेतावनी

ट्रंप का अल्टीमेटम: '48 घंटे बचे हैं'


इस राहत के बीच, डोनाल्ड ट्रंप के बयानों ने युद्ध की स्थिति को और बढ़ा दिया है। ट्रंप ने कहा है कि तेहरान पर हुए हमले में ईरान के कई शीर्ष सैन्य अधिकारी मारे गए हैं। ईरान को खुली चुनौती देते हुए ट्रंप ने कहा, 'समझौते या होर्मुज खोलने के लिए दिए गए 10 दिनों में से अब केवल 48 घंटे बचे हैं। इसके बाद ईरान पर चौतरफा आफत बरसेगी।' ट्रंप की यह चेतावनी संकेत देती है कि यदि ईरान ने अपनी जिद नहीं छोड़ी, तो आने वाले दो दिन वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और सुरक्षा के लिए बेहद खतरनाक हो सकते हैं।