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भारत के लिए राहत: होर्मुज से दो बड़े LPG जहाज रवाना

पश्चिम एशिया में चल रहे तनाव के बीच भारत को राहत की एक महत्वपूर्ण खबर मिली है। दो बड़े LPG जहाज, जिनमें कुल 66,392 मीट्रिक टन गैस लदी हुई है, होर्मुज स्ट्रेट से भारत की ओर रवाना हुए हैं। इन जहाजों की आवाजाही से भारत में ईंधन की बढ़ती कीमतों के बीच राहत की उम्मीद जगी है। जानिए इन जहाजों के बारे में और कैसे ये भारत के लिए महत्वपूर्ण हैं।
 

भारत को मिली राहत की खबर

नई दिल्ली: पश्चिम एशिया में चल रहे तनाव और ईंधन की बढ़ती कीमतों के बीच भारत के लिए एक सकारात्मक समाचार आया है। पिछले 24 घंटों में, होर्मुज स्ट्रेट को सुरक्षित रूप से पार करते हुए दो बड़े एलपीजी जहाज भारत की ओर बढ़ रहे हैं। इन जहाजों में कुल 66,392 मीट्रिक टन रसोई गैस लदी हुई है।


रिपोर्ट के अनुसार, एलपीजी कैरियर ‘सिमी’ बुधवार को होर्मुज स्ट्रेट पार कर भारत के लिए रवाना हुआ। इस जहाज में 21 क्रू मेंबर हैं और इसके आज गुजरात के दीनदयाल (कांडला) बंदरगाह पर पहुंचने की उम्मीद है। यह जहाज कतर के रास लफान टर्मिनल से गैस लेकर निकला है। वहीं, दूसरा जहाज ‘एनवी सनशाइन’ गुरुवार सुबह लगभग 9:30 बजे होर्मुज स्ट्रेट पार कर चुका है। इसके 18 मई तक न्यू मंगलुरु पोर्ट पहुंचने की संभावना है।


बंदरगाह, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव मुकेश मंगल ने बताया कि ‘सिमी’ ने 13 मई को और ‘एनवी सनशाइन’ ने 14 मई को सुरक्षित रूप से होर्मुज स्ट्रेट पार किया। उन्होंने कहा कि क्षेत्र में तनाव के बावजूद भारतीय जहाजों की आवाजाही जारी है। अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के कारण होर्मुज स्ट्रेट में समुद्री गतिविधियां प्रभावित हुई हैं, लेकिन अब तक कुल 13 भारतीय जहाज इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग से सुरक्षित गुजर चुके हैं।


मार्शल द्वीप के ध्वज वाला पोत ‘सिमी’ लगभग 19,965 टन एलपीजी लेकर आ रहा है, जबकि वियतनाम ध्वज वाला ‘एनवी सनशाइन’ यूएई की रुवैस रिफाइनरी से 46,427 टन एलपीजी लेकर भारत के लिए रवाना हुआ है। दोनों जहाजों में लदी गैस का माल Indian Oil Corporation (IOC) का बताया जा रहा है।


मार्च की शुरुआत से अब तक 12 एलपीजी टैंकर और एक कच्चा तेल टैंकर समेत कुल 13 भारतीय जहाज इस मार्ग से गुजर चुके हैं। हालांकि, खाड़ी क्षेत्र में अभी भी करीब 12 भारतीय पोत फंसे हुए हैं। इसके अलावा, भारत के लिए सामान लेकर जा रहे कई विदेशी जहाज भी क्षेत्रीय तनाव के कारण प्रभावित बताए जा रहे हैं।