भारत को 2029 तक नशा मुक्त बनाने की योजना: तीन वर्षीय रोडमैप
नशा मुक्ति के लिए नई रणनीति
50 करोड़ लोगों तक अभियान की पहुंच बढ़ाने की तैयारी, नशा मुक्ति केंद्रों की संख्या 334 से बढ़कर 1751 होगी
शिमला: केंद्र सरकार ने 2029 तक नशा मुक्त भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए एक तीन वर्षीय योजना बनाई है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने 26 जून 2026 को ‘नशा मुक्त भारत विजन डॉक्यूमेंट 2026-2029’ का अनावरण किया, जिसमें चार मुख्य स्तंभ, 25 घटक और 200 से अधिक कार्य बिंदु शामिल हैं।
गृह मंत्रालय के अपर महानिदेशक (मीडिया) राज कुमार ने शुक्रवार को शिमला में आयोजित ‘वार्तालाप’ कार्यक्रम में बताया कि इस रोडमैप के अंतर्गत मादक पदार्थों की तस्करी, वित्तीय स्रोतों, डार्कनेट और अवैध प्रयोगशालाओं पर कार्रवाई की जाएगी। इसके साथ ही, नशे की मांग को कम करने, उपचार और पुनर्वास पर भी ध्यान दिया जाएगा।
नशा मुक्ति केंद्रों की संख्या को 334 से बढ़ाकर मार्च 2029 तक 1751 करने का लक्ष्य रखा गया है। विशेष रूप से बच्चों और महिलाओं के लिए सुविधाएं प्रदान की जाएंगी, और प्रत्येक राज्य के एक मेडिकल कॉलेज में समर्पित विभाग स्थापित करने की योजना है।
इस अभियान को जन आंदोलन का रूप देने के लिए इसकी पहुंच को मौजूदा 20 करोड़ से बढ़ाकर 50 करोड़ लोगों तक पहुंचाने का लक्ष्य है। एनसीसी, एनएसएस और माई भारत के माध्यम से एक लाख ‘नशा मुक्त भारत मित्र’ तैयार किए जाएंगे। स्कूलों और कॉलेजों को नशे के खिलाफ जागरूकता फैलाने में प्रमुख भूमिका दी जाएगी।
एनसीबी के आंकड़ों के अनुसार, 2019 से जुलाई 2026 तक 93,33,987 किलोग्राम मादक पदार्थ जब्त किए गए, जिनकी अनुमानित कीमत 1.53 लाख करोड़ रुपये है। इस दौरान 44,88,576 किलोग्राम जब्त पदार्थ नष्ट किए गए और 3,992 करोड़ रुपये की अवैध संपत्तियां फ्रीज या जब्त की गईं। 128 अवैध प्रयोगशालाएं भी ध्वस्त की गईं।
शिमला में जल्द खुलेगा एनसीबी का जोनल कार्यालय
अमित शाह ने शिमला में नार्कोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो का जोनल कार्यालय स्थापित करने की स्वीकृति दी है। सरकार ने मार्च 2027 तक प्रत्येक राज्य में पूरी तरह सुसज्जित एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स गठित करने और मादक पदार्थों के नमूनों की 30 दिनों के भीतर जांच रिपोर्ट सुनिश्चित करने का लक्ष्य रखा है।