भारत-चीन संबंधों पर जू फेइहोंग का महत्वपूर्ण बयान
भारत-चीन संबंधों पर जू फेइहोंग का बयान
नई दिल्ली में एक महत्वपूर्ण कार्यक्रम में, जू फेइहोंग ने भारत और चीन के बीच संबंधों पर अपने विचार साझा किए। उन्होंने कहा कि कुछ लोग जानबूझकर दोनों देशों के बीच मतभेदों को बढ़ा-चढ़ाकर पेश कर रहे हैं, जिससे 'चीन खतरे' की धारणा उत्पन्न हो रही है। यह बयान तब आया है जब भारत और चीन के बीच संबंधों को संतुलित करने की कोशिशें चल रही हैं।
मतभेदों को बढ़ाने का आरोप
राजदूत शू फेइहोंग ने यह भी कहा कि कुछ शक्तियां जानबूझकर भारत और चीन के बीच मतभेदों को बढ़ा रही हैं। उनके अनुसार, 'चीन खतरे' की यह हाइप एक प्रकार का प्रचार है, जिसका उद्देश्य दोनों देशों के बीच दूरी पैदा करना है। उन्होंने यह भी बताया कि ऐसे प्रयासों से कुछ समूह अपने स्वार्थ साधने की कोशिश कर रहे हैं, जिससे दोनों देशों के बीच विश्वास कमजोर होता है।
युवाओं से संतुलित नजरिए की अपील
राजदूत ने भारतीय युवाओं से आग्रह किया कि वे किसी भी जानकारी को समझने से पहले निष्पक्ष और तर्कसंगत दृष्टिकोण अपनाएं। उन्होंने युवाओं को दोनों देशों के बीच सबसे महत्वपूर्ण कड़ी बताया और कहा कि उनकी सोच भविष्य के रिश्तों की दिशा तय करेगी। इसलिए, यह आवश्यक है कि वे अफवाहों से दूर रहें और सही जानकारी के आधार पर राय बनाएं।
आपसी सहयोग पर जोर
शू फेइहोंग ने कहा कि भारत और चीन जैसे पड़ोसी देशों को प्रतिस्पर्धा के बजाय सहयोग पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए। उन्होंने 'ड्रैगन-एलीफेंट टैंगो' का उल्लेख करते हुए कहा कि दोनों देशों की साझेदारी एशिया और विश्व के लिए सकारात्मक साबित हो सकती है। उनका मानना है कि साझा विकास और स्थिरता के लिए मिलकर काम करना आवश्यक है।
चीन आने का दिया निमंत्रण
राजदूत ने भारतीय युवाओं को चीन आने का निमंत्रण भी दिया, ताकि वे वहां के विकास को नजदीक से देख सकें। उन्होंने कहा कि लोगों के बीच संपर्क बढ़ने से गलतफहमियां कम होंगी और रिश्ते मजबूत होंगे। यह बयान ऐसे समय में आया है जब दोनों देश कूटनीतिक स्तर पर संबंधों को बेहतर बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।