भारत-चीन संबंधों में सुधार की दिशा में मोदी और जिनपिंग की महत्वपूर्ण बैठक
नई दिल्ली में मोदी और जिनपिंग की द्विपक्षीय वार्ता
नई दिल्ली: शनिवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ एक महत्वपूर्ण द्विपक्षीय बैठक की। इस चर्चा में दोनों देशों के बीच संबंधों को सामान्य करने, व्यापार और निवेश को बढ़ावा देने, और सीमा क्षेत्रों में शांति बनाए रखने जैसे मुद्दों पर विचार किया गया। भारत में चीन के राजदूत ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर इस बैठक की जानकारी साझा की। इसे भारत-चीन संबंधों में सुधार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
शी जिनपिंग का भारत-चीन संबंधों पर दृष्टिकोण
भारत और चीन साझेदार हैं, प्रतिद्वंद्वी नहीं: शी जिनपिंग
चीनी राजदूत के अनुसार, शी जिनपिंग ने कहा कि भारत और चीन को एक-दूसरे को प्रतिद्वंद्वी के रूप में नहीं, बल्कि साझेदार के रूप में देखना चाहिए। उन्होंने दोनों देशों के बीच आर्थिक और व्यापारिक सहयोग को बढ़ाने पर जोर दिया और कहा कि आर्थिक चिंताओं को संतुलित तरीके से हल करने की आवश्यकता है।
On Saturday in New Delhi, Chinese President Xi Jinping and Indian Prime Minister Narendra Modi conducted a candid and in-depth exchange of views, and reached important consensus that China and India should be partners.
— China Military Bugle (@ChinaMilBugle) September 12, 2026
Xi said China has always viewed and developed its relations… pic.twitter.com/21M6aTeIMM
सीमा विवाद पर शांति और आपसी सम्मान की आवश्यकता
सीमा विवाद पर शांति और आपसी सम्मान पर जोर:
बैठक में भारत-चीन सीमा विवाद भी एक महत्वपूर्ण विषय रहा। शी जिनपिंग ने सीमा मुद्दे और द्विपक्षीय संबंधों को समानांतर रूप से आगे बढ़ाने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने सीमा क्षेत्रों में शांति बनाए रखने और आपसी समझ को बढ़ाने की बात की। यह मुद्दा इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि 2020 में गलवान घाटी में हुई हिंसक झड़प के बाद भारत-चीन संबंधों में तनाव बढ़ गया था।
अंतरराष्ट्रीय मंचों पर सहयोग बढ़ाने की आवश्यकता
BRICS, SCO और G20 में सहयोग बढ़ाने की बात:
शी जिनपिंग ने BRICS, SCO, UN और G20 जैसे अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत के साथ मिलकर काम करने की इच्छा व्यक्त की। उन्होंने वैश्विक चुनौतियों का सामना करने के लिए दोनों देशों के बीच बेहतर समन्वय की आवश्यकता बताई। जिनपिंग ने कहा कि भारत और चीन को मिलकर विकास की कहानी लिखनी चाहिए, न कि ड्रैगन और हाथी की लड़ाई में उलझना चाहिए।