भारत-चीन सीमा पर तनाव: ITBP प्रमुख के बयान से सियासी हलचल
ITBP प्रमुख का बयान और सियासी प्रतिक्रिया
भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP) के महानिदेशक शत्रुजीत कपूर के हालिया बयान ने देश की राजनीति में हलचल मचा दी है। उन्होंने कहा कि अरुणाचल प्रदेश के सीमावर्ती क्षेत्रों में चीनी सैनिकों के साथ टकराव की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं। उनके बयान के तुरंत बाद, विदेश मंत्रालय ने अपनी प्रतिक्रिया दी। प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने बताया कि द्विपक्षीय संबंधों के विकास के लिए सीमावर्ती क्षेत्रों में शांति और स्थिरता बनाए रखना अत्यंत आवश्यक है।
जायसवाल ने आगे कहा, 'भारत-चीन सीमावर्ती क्षेत्रों में स्थिति तब बिगड़ती है जब चीनी सेनाएं निर्धारित गश्ती तरीकों से हटकर गतिविधियां करती हैं। दोनों पक्ष मौजूदा राजनयिक और सैन्य तंत्रों का उपयोग करते रहते हैं ताकि लंबित मुद्दों का समाधान किया जा सके और 'लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल' (LAC) पर किसी भी प्रकार की गलतफहमी से बचा जा सके।'
जायसवाल ने यह भी कहा कि दोनों पक्ष सीमा प्रबंधन में सुधार के लिए LAC से जुड़े कुछ क्षेत्रों में आपसी समझ बढ़ाने के तरीकों पर चर्चा करने के लिए सहमत हुए हैं। द्विपक्षीय संबंधों के समग्र विकास के लिए सीमावर्ती क्षेत्रों में शांति और स्थिरता बनाए रखना बहुत जरूरी है।
कांग्रेस नेताओं की प्रतिक्रिया
चीन को मिली 'क्लीन चिट': खरगे
शत्रुजीत कपूर के बयान पर कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और महासचिव जयराम रमेश ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि चीन के मामले में सरकार को देश और संसद को विश्वास में लेना चाहिए। खरगे ने अपने एक्स अकाउंट पर लिखा, 'चीन को बहुत 'क्लीन चिट' दी जा चुकी हैं। प्रधानमंत्री मोदी को भारत के सामने सच रखना चाहिए!' उन्होंने राष्ट्रीय सुरक्षा, आर्थिक सुरक्षा और कूटनीतिक जवाबदेही पर सरकार से स्पष्टीकरण मांगा।
जयराम रमेश की चिंताएं
पीएम की चुप्पी पर सवाल: जयराम रमेश
जयराम रमेश ने एक विस्तृत सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा कि जहां एक ओर प्रधानमंत्री चीन के सामने लगातार रियायतें दे रहे हैं, वहीं ITBP के महानिदेशक ने अरुणाचल प्रदेश में चीनी पीएलए के साथ हालिया टकरावों में ITBP के प्रदर्शन की सराहना की है। लेकिन प्रधानमंत्री और उनका पूरा तंत्र इस गंभीर मुद्दे पर चुप्पी साधे हुए हैं।
उन्होंने आगे कहा, 'ताकसिंग में टकराव के बाद पिछले महीने अरुणाचल प्रदेश के वाचा और दमाई में कोर कमांडर स्तर की बातचीत हुई। स्थानीय लोगों का कहना है कि लद्दाख की तरह एक बार फिर गश्त के कुछ बिंदु हमारे हाथ से निकल गए हैं। चीन अरुणाचल प्रदेश के हमारे शहरों के नाम बदल रहा है और 60,000 मेगावाट का एक बांध बना रहा है, जो हमारी पारिस्थितिकी और जल सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा है।'