भारत ने 2019 से 274 भगोड़े अपराधियों को वापस लाने में हासिल की सफलता
भगोड़े अपराधियों के खिलाफ सरकार की कार्रवाई
केंद्र सरकार ने भगोड़े अपराधियों के खिलाफ अपनी कार्रवाई की उपलब्धियों का विवरण साझा किया है। 2019 से अब तक, 36 देशों से 274 भगोड़े अपराधियों को भारत लाने का दावा किया गया है। सरकार ने इस मुद्दे को राष्ट्रीय प्राथमिकता बनाते हुए प्रत्यर्पण प्रक्रिया को तेज किया है। इसके लिए कानूनी सुधार, अंतरराष्ट्रीय सहयोग, आधुनिक तकनीक और विभिन्न जांच एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय का उपयोग किया गया है।
2014 से पहले की चुनौतियाँ
सरकार के अनुसार, 2014 से पहले भारत की प्रत्यर्पण प्रणाली कई कानूनी और प्रशासनिक समस्याओं का सामना कर रही थी। उस समय केवल 37 देशों के साथ प्रत्यर्पण संधियाँ थीं और आर्थिक अपराधियों की संपत्ति जब्त करने के लिए कोई विशेष कानून नहीं था। 2004 से 2013 के बीच, औसतन हर साल केवल 4 भगोड़े अपराधियों का प्रत्यर्पण हो पाता था, जबकि 110 से अधिक अनुरोध लंबित थे।
नए कानूनों का प्रभाव
सरकार ने भगोड़ा आर्थिक अपराधी अधिनियम लागू किया, जिससे आर्थिक अपराधियों की संपत्ति जब्त करने और उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई को मजबूती मिली। 2019 में NIA और UAPA संशोधन अधिनियम लागू किए गए। 2020 से भगोड़ों की वापसी की प्रक्रिया मिशन मोड में शुरू की गई, जिससे कार्रवाई का दायरा बढ़ा।
अंतरराष्ट्रीय सहयोग में वृद्धि
केंद्र सरकार ने भगोड़े अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई को प्रभावी बनाने के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग को भी मजबूत किया है। 2022 में भारत ने इंटरपोल की 90वीं जनरल असेंबली की मेज़बानी की। BHARATPOL प्लेटफॉर्म के लॉन्च से CBI, राज्य पुलिस और केंद्रीय जांच एजेंसियों को एकीकृत डिजिटल नेटवर्क से जोड़ा गया है।
संपत्ति जब्ती और रेड कॉर्नर नोटिस
सरकार के अनुसार, 2019 से 2026 के बीच मनी लॉन्ड्रिंग निरोधक कानून के तहत भगोड़े आर्थिक अपराधियों की ₹17,874 करोड़ की संपत्ति जब्त की गई है। इसके अलावा, इंटरपोल के माध्यम से जारी रेड कॉर्नर नोटिस की संख्या में भी वृद्धि हुई है।