भारत ने UNGA में पाकिस्तान को दिया करारा जवाब, कश्मीर पर उठाए सवाल
भारत का सख्त जवाब
न्यूयॉर्क: संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) के 81वें सत्र में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ द्वारा कश्मीर के मुद्दे पर की गई टिप्पणियों और सिंधु जल संधि पर दिए गए बयानों का भारत ने सख्त जवाब दिया है। भारतीय मिशन की प्रथम सचिव पेटल गहलोत ने 'राइट टू रिप्लाई' के तहत पाकिस्तान के झूठे आरोपों को खारिज करते हुए उसे आतंकवाद का केंद्र बताया। उन्होंने याद दिलाया कि न्यूयॉर्क और पूरी दुनिया ने हाल ही में 9/11 आतंकी हमले की 25वीं वर्षगांठ मनाई थी, और उस हमले का मास्टरमाइंड ओसामा बिन लादेन पाकिस्तान की सैन्य अकादमी के पास ही छिपा हुआ था।
पाकिस्तान की सरकार की असलियत
सेना की कठपुतली सरकार, दिन में शांति की बात और रात में आतंकवाद
पेटल गहलोत ने पाकिस्तान की सरकार के पाखंड को उजागर करते हुए कहा कि दुनिया ऐसे शासन से लोकतांत्रिक मूल्यों और मानवाधिकारों पर उपदेश नहीं सुन सकती, जिसकी अपनी राजधानी अपने नागरिकों के डर से किले में तब्दील हो चुकी है। उन्होंने इसे 'फॉर्म 47 की सरकार' करार दिया, जो सेना द्वारा संचालित है। भारतीय राजनयिक ने स्पष्ट किया कि पाकिस्तान का इतिहास नफरत और कट्टरता से भरा हुआ है; वे दिन में शांति की बात करते हैं, लेकिन रात में आतंकवाद को बढ़ावा देते हैं।
कश्मीर भारत का अभिन्न हिस्सा
जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न अंग, PoK में अपने ही लोगों पर जुल्म ढा रहा पाक
पेटल गहलोत ने कश्मीर के मुद्दे पर पाकिस्तान को कड़ा जवाब देते हुए कहा कि जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न हिस्सा है। उन्होंने कहा कि अगर बात करनी है, तो ध्यान पाकिस्तान के अवैध कब्जे वाले कश्मीर (PoK) की ओर जाना चाहिए। रावलकोट और आसपास के क्षेत्रों में रहने वाले लोगों से पूछिए कि वे किस तरह से दशकों से हिंसा और नागरिक अधिकारों के हनन का सामना कर रहे हैं। उन्होंने अल्पसंख्यकों पर हो रहे अत्याचारों और ईशनिंदा कानूनों के दुरुपयोग को लेकर भी पाकिस्तान के दोहरे चरित्र को उजागर किया।
भारत का आतंकवाद के प्रति सख्त रुख
ऑपरेशन सिंदूर का दिया हवाला, आतंकवाद पर भारत का रुख सख्त
भारतीय राजनयिक ने आतंकवाद के खिलाफ भारत के आक्रामक रुख को दोहराते हुए कहा कि देश आत्मरक्षा के अधिकार का पूरी ताकत से इस्तेमाल करेगा। उन्होंने 'ऑपरेशन सिंदूर' का संदर्भ देते हुए चेतावनी दी कि भारत ने साबित कर दिया है कि आतंकवादियों के लिए अब न तो कोई सुरक्षित स्थान है और न ही भागने का रास्ता। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान की सीमा पार आतंकवाद को बढ़ावा देने की नीति के गंभीर परिणाम होंगे।