भारत ने अमेरिका से एलपीजी आयात को दोगुना करने की योजना बनाई
भारत की नई ऊर्जा नीति
पश्चिम एशिया संकट से सबक लेते हुए भारत की नई दिशा
भारत अपनी ऊर्जा आवश्यकताओं के लिए विदेशी स्रोतों पर निर्भर है, चाहे वह पेट्रोल-डीजल हो या लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस (एलपीजी)। पहले, भारत का अधिकांश आयात पश्चिम एशिया से होता था। लेकिन हाल ही में अमेरिका-ईरान संघर्ष के कारण, होर्मुज जलडरूमध्य में आपूर्ति बाधित हुई, जिससे भारत को कच्चे तेल और एलपीजी की कमी का सामना करना पड़ा।
इस स्थिति से सीख लेते हुए, भारत ने अपनी नीति में बदलाव किया है। अब, भारत अमेरिका से एलपीजी का आयात दोगुना करने की योजना बना रहा है। तेल कंपनियां अमेरिका से सालाना 22 लाख टन एलपीजी लाने की तैयारी कर रही हैं।
नई रणनीति के तहत एलपीजी आयात
अमेरिका-ईरान संघर्ष के बाद, भारत ने खाड़ी देशों से तेल और गैस की आपूर्ति में कमी के चलते अपनी रणनीति में महत्वपूर्ण बदलाव किया है। अब, भारत ने एलपीजी के लिए अर्जेंटीना, अल्जीरिया, नार्वे, नाइजीरिया और मलेशिया जैसे देशों की ओर भी ध्यान दिया है। रिपोर्टों के अनुसार, भारत की तेल-गैस कंपनियां अमेरिका से एलपीजी की आपूर्ति को दोगुना कर सकती हैं। यह कदम भारत और अमेरिका के बीच बढ़ते संबंधों का प्रतीक माना जा रहा है।
अमेरिका भारत के लिए गैस आयात का एक प्रमुख स्रोत रहा है।
अफ्रीकी देशों से भी बातचीत जारी
भारत एलपीजी की आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए अफ्रीकी देशों जैसे अल्जीरिया पर भी विचार कर रहा है। भारत कई देशों के साथ गैस की जरूरतों के लिए समझौतों पर चर्चा कर रहा है, ताकि कतर, कुवैत, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात जैसे खाड़ी देशों पर निर्भरता कम की जा सके।