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भारत ने ऊर्जा संकट से निपटने के लिए तैयार किया प्लान बी

भारत ने मिडिल ईस्ट में चल रहे तनाव के कारण उत्पन्न ऊर्जा संकट से निपटने के लिए एक वैकल्पिक योजना तैयार की है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संसद में स्थिति को नियंत्रण में बताते हुए कहा कि देश ने ऊर्जा आयात को विविधित किया है। उन्होंने बताया कि भारत अब 41 देशों से ऊर्जा आयात कर रहा है, जिससे संकट का प्रभाव कम हो रहा है। जानें इस संकट से निपटने के लिए सरकार की अन्य रणनीतियों के बारे में।
 

मिडिल ईस्ट में तनाव और भारत की स्थिति


मिडिल ईस्ट में चल रहे तनाव के कारण कई देशों में तेल और गैस की आपूर्ति बाधित हो गई है। हालांकि, भारत में स्थिति अभी भी नियंत्रण में है। इस बीच, भारत सरकार ने इस समस्या से निपटने के लिए एक वैकल्पिक योजना तैयार कर ली है। वहीं, पड़ोसी देशों पाकिस्तान और बांग्लादेश में कोविड जैसी स्थिति उत्पन्न हो गई है।


तेल की आपूर्ति में बाधा

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से विश्व का 20 प्रतिशत कच्चा तेल आयात होता है। इसके बंद होने से कई देशों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। पाकिस्तान में पेट्रोल और डीजल की कीमतें आसमान छू रही हैं, और स्कूलों को फिर से ऑनलाइन मोड में भेजा गया है। दक्षिण कोरिया में भी स्थिति चिंताजनक बनी हुई है, जहां सरकार ने कई निर्देश जारी किए हैं।


एलपीजी संकट का समाधान

भारत की विशाल जनसंख्या को देखते हुए, देश में स्थिति अभी भी नियंत्रण में है। हालांकि, एलपीजी की कमी को देखते हुए केंद्र सरकार ने प्लान बी को लागू कर दिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संसद में कहा कि इस संकट के समय में घबराने की आवश्यकता नहीं है। भारत ने ऊर्जा आयात को विविधित किया है।


उन्होंने बताया कि अब देश केवल खाड़ी देशों पर निर्भर नहीं है। पहले भारत 27 देशों से ऊर्जा आयात करता था, अब यह संख्या बढ़कर 41 हो गई है। ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार, भारत ने इस संकट के दौरान रूस से 6 करोड़ बैरल कच्चा तेल खरीदा है। इसके अलावा, पश्चिम अफ्रीका से भी बड़े पैमाने पर तेल मंगवाया जा रहा है।


प्रधानमंत्री मोदी की तैयारी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बताया कि देश के पास 53 लाख टन से अधिक रणनीतिक पेट्रोलियम रिजर्व है, और सरकार इस क्षमता को बढ़ाने के लिए काम कर रही है। उन्होंने कहा कि देश में रिफाइनिंग क्षमता को बढ़ाया जा रहा है, और घरेलू गैस उत्पादन में वृद्धि के साथ पाइप्ड नेचुरल गैस (पीएनजी) को भी बढ़ावा दिया जा रहा है।


एलपीजी संकट के बीच, अल्जीरिया, ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, नॉर्वे जैसे कई देशों से अतिरिक्त एलएनजी और एलपीजी के कार्गो भारत पहुंच रहे हैं। घरेलू एलपीजी उत्पादन भी बढ़ाया गया है, जिससे संकट का प्रभाव भारत पर कम हो रहा है।