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भारत ने जबरन मजदूरी से बने विदेशी सामान के आयात पर लगाया प्रतिबंध

भारत ने अपनी विदेश व्यापार नीति में एक महत्वपूर्ण बदलाव करते हुए जबरन मजदूरी से बने विदेशी उत्पादों के आयात पर प्रतिबंध लगाने का निर्णय लिया है। इस कदम से भारत ने स्पष्ट किया है कि वह व्यापार के साथ-साथ मानवाधिकारों का भी सम्मान करता है। नई नीति के तहत, यदि किसी उत्पाद के निर्माण में जबरन मजदूरी का प्रमाण मिलता है, तो उसे ब्लैकलिस्ट किया जा सकता है। यह निर्णय वैश्विक मैन्युफैक्चरिंग हब बनने की दिशा में भारत के प्रयासों को भी दर्शाता है। जानें इस नीति के पीछे के कारण और इसके संभावित प्रभाव।
 

भारत की नई व्यापार नीति का ऐतिहासिक बदलाव

नई दिल्ली: विदेशी कंपनियों ने भारतीय बाजारों में सस्ते उत्पादों के माध्यम से अपनी पकड़ मजबूत की है, लेकिन अब इस पर रोक लगने जा रही है। भारत सरकार ने एक नई विदेश व्यापार नीति (FTP 2023) के तहत 'जबरन मजदूरी' से बने उत्पादों के आयात पर सख्त पाबंदी लगाने का निर्णय लिया है। इस कदम से भारत ने स्पष्ट संदेश दिया है कि वह व्यापार के साथ-साथ मानवाधिकारों और पारदर्शी आपूर्ति श्रृंखला के प्रति गंभीर है।


DGFT को मिली नई शक्तियाँ

सरकार की नई अधिसूचना के अनुसार, विदेश व्यापार महानिदेशालय (DGFT) को और अधिक शक्तियाँ दी गई हैं। नए पैरा 2.20B के तहत, यदि किसी विदेशी उत्पाद के निर्माण में जबरन मजदूरी के प्रमाण मिलते हैं, तो केंद्र सरकार उस उत्पाद को ब्लैकलिस्ट कर सकती है। इस मामले की जांच की जिम्मेदारी सीधे DGFT पर होगी और कानूनी कार्रवाई निर्धारित नियमों के अनुसार की जाएगी।


जबरन मजदूरी की परिभाषा का निर्धारण

इस नए कानून की एक महत्वपूर्ण विशेषता यह है कि इसमें पहली बार 'फोर्स्ड लेबर' की स्पष्ट परिभाषा दी गई है। नई नीति के पैरा 11.64 में अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन (ILO) के कंवेंशन का उल्लेख करते हुए कहा गया है कि यदि किसी व्यक्ति से डराकर या उसकी इच्छा के खिलाफ काम लिया जाता है, तो उसे जबरन मजदूरी माना जाएगा। इस परिभाषा के साथ, भविष्य में ऐसे मामलों को पकड़ना और उन पर कार्रवाई करना आसान होगा।


चीन पर सीधा प्रभाव

सरकार ने इस अधिसूचना में किसी विशेष देश या कंपनी का नाम नहीं लिया है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि इसका प्रभाव चीन जैसे देशों के निर्यात पर पड़ेगा। अमेरिका और अन्य मानवाधिकार संगठनों ने शिनजियांग प्रांत में उइगर मुसलमानों से जबरन मजदूरी कराए जाने का आरोप लगाया है। अमेरिका और यूरोपीय संघ पहले ही ऐसे उत्पादों के आयात पर सख्त नियम लागू कर चुके हैं।


भारत का वैश्विक मैन्युफैक्चरिंग हब बनने का प्रयास

भारत का यह निर्णय ऐसे समय में आया है जब वह खुद को चीन के विकल्प के रूप में प्रस्तुत कर रहा है। भारत यूरोप और ब्रिटेन के साथ फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) पर बातचीत कर रहा है। आज के वैश्विक बाजार में, केवल सस्ते या अच्छे उत्पाद होना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि यह भी महत्वपूर्ण है कि उन्हें बनाने में मानवाधिकारों और पर्यावरण के नियमों का पालन किया गया हो। विशेषज्ञों का मानना है कि भारत का यह कदम 'एथिकल ट्रेड' की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।