×

भारत ने बैलिस्टिक मिसाइल डिफेंस प्रणाली का सफल परीक्षण किया

भारत ने अपने बैलिस्टिक मिसाइल डिफेंस (BMD) प्रणाली का सफल परीक्षण किया है, जो देश की सुरक्षा क्षमताओं को एक नई ऊंचाई पर ले गया है। रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) द्वारा किए गए इस परीक्षण में लंबी दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलों का सामना करने की क्षमता साबित हुई है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इसे एक महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया। जानें, इस प्रणाली की कार्यप्रणाली और भारत का इस क्षेत्र में विशेष स्थान क्या है।
 

भारत की नई मिसाइल रक्षा प्रणाली


भारत ने अपने बैलिस्टिक मिसाइल डिफेंस (BMD) सिस्टम का सफल परीक्षण किया है, जो देश की रक्षा क्षमताओं को एक नई ऊंचाई पर ले गया है। रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) ने 10 और 11 जून को तीन लगातार उड़ान परीक्षण किए, जिससे यह स्पष्ट हुआ कि भारत अब लंबी दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलों, विशेषकर इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल (ICBM) के खतरों का सामना करने में सक्षम है।


रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने 13 जून को परीक्षण से संबंधित तस्वीरें साझा करते हुए इसे भारत की सुरक्षा तैयारियों में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया। इसके साथ ही, नेवल एंटी-शिप मिसाइल (मध्यम रेंज) का भी सफल परीक्षण किया गया, जिससे समुद्री सुरक्षा में और मजबूती आई है।


The @DRDO_India has successfully demonstrated multiple crucial technologies bolstering nations defence capabilities against different types of enemy threats.

Three consecutive flight-tests were successfully conducted to demonstrate multi-layered defence against long range… pic.twitter.com/0DKQF0LB30

— Rajnath Singh (@rajnathsingh) June 13, 2026



ICBM क्या है और यह क्यों खतरनाक है?


इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल (ICBM) ऐसी मिसाइल होती है जो एक महाद्वीप से दूसरे महाद्वीप तक हमला करने की क्षमता रखती है। इसकी मारक क्षमता आमतौर पर 5,500 किलोमीटर से अधिक होती है। ये मिसाइलें अत्यधिक ऊंचाई पर पहुंचने के बाद पृथ्वी की ओर लौटती हैं और तेज गति से अपने लक्ष्य पर हमला करती हैं। कई ICBM परमाणु हथियार ले जाने में भी सक्षम होती हैं, जिससे इन्हें दुनिया के सबसे खतरनाक हथियारों में गिना जाता है।


भारत की मल्टी-लेयर्ड BMD प्रणाली कैसे कार्य करती है?


इस रक्षा प्रणाली का मुख्य उद्देश्य दुश्मन की मिसाइल को लक्ष्य तक पहुंचने से पहले ही नष्ट करना है। सबसे पहले, अत्याधुनिक रडार आने वाली मिसाइल का पता लगाते हैं। इसके बाद, कमांड सेंटर खतरे का विश्लेषण करता है और इंटरसेप्टर मिसाइल को लॉन्च किया जाता है। यह इंटरसेप्टर हवा में ही दुश्मन की मिसाइल को निशाना बनाकर समाप्त कर देता है।


इस प्रणाली की सबसे बड़ी विशेषता इसकी ‘मल्टी-लेयर’ सुरक्षा है। यदि पहली इंटरसेप्टर मिसाइल लक्ष्य को नष्ट करने में असफल रहती है, तो दूसरी सुरक्षा परत सक्रिय हो जाती है। इससे दुश्मन की मिसाइल के बच निकलने की संभावना बहुत कम हो जाती है।


भारत का विशेष स्थान


विशेषज्ञों के अनुसार, इस उपलब्धि के बाद भारत उन चुनिंदा देशों में शामिल हो गया है जिनके पास ऑपरेशनल स्तर की बैलिस्टिक मिसाइल डिफेंस क्षमता है। इससे पहले, ऐसी तकनीक केवल अमेरिका, रूस, इजराइल और चीन जैसे देशों के पास ही थी। हालिया सफल परीक्षण भारत की स्वदेशी रक्षा तकनीक और रणनीतिक ताकत का एक बड़ा प्रमाण है।