भारत ने मक्का पर ड्रोन हमले की कड़ी निंदा की
भारत की प्रतिक्रिया
भारत ने सऊदी अरब के पवित्र शहर मक्का पर हुए ड्रोन हमले की कड़ी निंदा की है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा, 'मक्का के निकट हुए इस हमले को लेकर हमारी गहरी चिंता है। भारत सऊदी अरब के संप्रभु क्षेत्र पर हमलों और नागरिकों की सुरक्षा को खतरे में डालने वाली गतिविधियों की निंदा करता है। मक्का का यह हमला विशेष रूप से चिंताजनक है, क्योंकि यह शहर दुनिया भर के मुसलमानों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। हम आशा करते हैं कि इस क्षेत्र में शीघ्र शांति और स्थिरता स्थापित होगी।'
अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ सहित कई अन्य देशों ने भी मक्का पर हुए हमले की निंदा की है। मंगलवार रात, सऊदी अरब ने यमन के हूती विद्रोहियों पर इस्लाम के सबसे पवित्र शहर पर ड्रोन हमले का आरोप लगाया। हालांकि, हूती विद्रोहियों ने इस आरोप को खारिज कर दिया। क्षेत्र के कई देशों ने इस हमले की निंदा की, लेकिन किसी ने भी सैन्य सहायता भेजने का संकेत नहीं दिया।
पाकिस्तान का समर्थन
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने मक्का पर ड्रोन हमले के प्रयास की निंदा करते हुए कहा कि उनका देश और सऊदी अरब एकजुटता से खड़े हैं। यह पाकिस्तान से आई निंदा की तीसरी घटना है। हाल ही में, शहबाज शरीफ ने सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान से फोन पर बात की, जिसमें उन्होंने हूतियों के हमले की निंदा की। ऑर्गनाइजेशन ऑफ इस्लामिक कोऑपरेशन ने भी इस हमले की कोशिश की निंदा की और इसे पवित्र स्थलों की पवित्रता का उल्लंघन बताया।
सऊदी अरब की स्थिति
सऊदी अरब मध्य पूर्व में अमेरिका का प्रमुख सहयोगी है, लेकिन हूतियों के खिलाफ संघर्ष में उसे अमेरिका का समर्थन नहीं मिला। अन्य सहयोगी जैसे तुर्की और पाकिस्तान ने भी केवल निंदा तक ही सीमित रखा है। इस बीच, हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब के भीतर अपने हमलों का दायरा बढ़ा दिया है, जिससे सऊदी अरब एक बड़े संघर्ष में उलझता जा रहा है।
सहायता की कमी
सऊदी अरब ने मदद नहीं मांगी
तुर्की और पाकिस्तान ने कहा कि मक्का समझौते के तहत सऊदी अरब ने किसी प्रकार की मदद का अनुरोध नहीं किया। 7 अगस्त को मक्का में पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्की के बीच एक रक्षा समझौता हुआ था, लेकिन हूती विद्रोहियों के साथ संघर्ष के बावजूद यह समझौता अभी तक लागू नहीं हुआ है। अधिकारियों ने बताया कि हूतियों की बढ़ती आक्रामकता के जवाब में सऊदी अरब से मदद का कोई अनुरोध नहीं मिला है।
तेल निर्यात पर खतरा
तेल निर्यात खतरे में पड़ा
ईरान समर्थित मिलिशिया ने इराक से सऊदी अरब की महत्वपूर्ण तेल पाइपलाइन को निशाना बनाया, जिसके परिणामस्वरूप यह पाइपलाइन बंद हो गई है। इसके बंद होने से वैश्विक तेल बाजार से लगभग 5 प्रतिशत तेल गायब हो गया है। बाब अल-मंडेब पर हूती विद्रोहियों के कब्जे और पाइपलाइन पर हमले के कारण तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर चली गई हैं। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज और बाब अल-मंडेब के रास्ते सऊदी अरब का तेल निर्यात खतरे में पड़ गया है।