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भारत ने यूएई पर हमलों की निंदा की, पीएम मोदी ने जताई एकजुटता

भारत ने हाल ही में यूएई पर हुए मिसाइल और ड्रोन हमलों की कड़ी निंदा की है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यूएई के राष्ट्रपति से बातचीत में एकजुटता जताते हुए क्षेत्रीय शांति के लिए भारत की प्रतिबद्धता को दोहराया। इस लेख में जानें कि कैसे भारत ने इस संकट के समय में यूएई के साथ खड़ा होने का संकल्प लिया है और ईरान के हमलों के संदर्भ में क्या स्थिति है।
 

भारत की यूएई के प्रति एकजुटता


भारत ने हाल ही में पश्चिम एशिया में बिगड़ते हालात के बीच संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) पर हुए मिसाइल और ड्रोन हमलों की कड़ी निंदा की है। इस संकट के समय में, भारत ने अमीरात के साथ अपनी एकजुटता व्यक्त की। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को यूएई के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान से फोन पर बात करते हुए कहा कि भारत क्षेत्रीय शांति और स्थिरता के लिए प्रतिबद्ध है।


पीएम मोदी की संवेदनाएं

प्रधानमंत्री मोदी ने बातचीत के दौरान यूएई पर हुए हमलों की निंदा की और इस घटना में जान गंवाने वालों के प्रति संवेदना व्यक्त की। उन्होंने कहा कि भारत इस कठिन समय में यूएई के साथ मजबूती से खड़ा है और क्षेत्र में तनाव कम करने के प्रयासों का समर्थन करता है। इसके साथ ही, उन्होंने यूएई में रह रहे भारतीय समुदाय की सुरक्षा के लिए वहां की सरकार का आभार भी व्यक्त किया।


ईरान के हमले का संदर्भ

शनिवार को ईरान ने अमेरिका और इजरायल द्वारा किए गए संयुक्त सैन्य हमलों के जवाब में यूएई समेत कई पश्चिम एशियाई देशों को निशाना बनाते हुए मिसाइल और ड्रोन हमले किए। इन हमलों के पीछे ईरान के सर्वोच्च नेता अली खामेनेई और कई वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों की मौत का संदर्भ बताया जा रहा है, जिससे क्षेत्र में तनाव और बढ़ गया है।


यूएई में भारतीय नागरिकों की संख्या

यूएई में लगभग 40 लाख भारतीय नागरिक निवास करते हैं, जो वहां की अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं और भारत को हर साल अरबों डॉलर भेजते हैं। यूएई भारत के लिए ऊर्जा का एक प्रमुख स्रोत और महत्वपूर्ण व्यापारिक साझेदार है, जहां दोनों देशों के बीच वार्षिक व्यापार 100 अरब डॉलर से अधिक है। हालिया हमलों में घायल हुए 58 विदेशी नागरिकों में एक भारतीय भी शामिल है, जबकि बांग्लादेश, नेपाल और पाकिस्तान के कुछ नागरिकों की मौत की पुष्टि हुई है।


भारत की कूटनीतिक पहल

इस बीच, भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने ओमान के विदेश मंत्री बदर अलबुसैदी से मौजूदा हालात पर चर्चा की। ओमान ने ईरान और अमेरिका के बीच कूटनीतिक संवाद में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है, इसलिए इस बातचीत को क्षेत्रीय स्थिरता के प्रयासों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।


भारत का संतुलित दृष्टिकोण

भारत ने इस पूरे घटनाक्रम पर संतुलित और सावधानीपूर्ण दृष्टिकोण अपनाया है। विदेश मंत्रालय ने सभी संबंधित देशों से संयम बरतने, तनाव को और न बढ़ाने और संवाद तथा कूटनीति के माध्यम से समाधान खोजने की अपील की है। साथ ही, सभी देशों की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान करने पर जोर दिया गया है।


पश्चिम एशिया में एक करोड़ से अधिक भारतीय नागरिक रहते और काम करते हैं, जिनकी सुरक्षा भारत के लिए सर्वोच्च प्राथमिकता है। स्थिति को देखते हुए, क्षेत्र के कई देशों में भारतीय दूतावासों ने अपने नागरिकों को सतर्क रहने, भीड़भाड़ वाले स्थानों से दूर रहने और अनावश्यक यात्रा से बचने की सलाह दी है।