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भारत ने विक्रम-1 रॉकेट के सफल लॉन्च के साथ नया स्पेस युग शुरू किया

भारत ने शनिवार को विक्रम-1 रॉकेट को सफलतापूर्वक लॉन्च कर एक नया स्पेस युग शुरू किया। यह भारत का पहला निजी तौर पर विकसित ऑर्बिटल-क्लास रॉकेट है, जिसने अंतरिक्ष में अपनी निर्धारित कक्षा हासिल की। विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर ने इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर बधाई दी, जबकि विदेश मंत्रालय ने इसे भारत के स्पेस सेक्टर में सुधारों और युवा उद्यमिता की भावना का प्रतीक बताया। जानें इस सफलता के पीछे की कहानी और इसके महत्व के बारे में।
 

भारत का पहला निजी ऑर्बिटल रॉकेट लॉन्च

नई दिल्ली: भारत ने शनिवार को श्रीहरिकोटा के सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से अपने पहले निजी तौर पर विकसित ऑर्बिटल-क्लास रॉकेट 'विक्रम-1' को सफलतापूर्वक लॉन्च किया। इस उपलब्धि के साथ, भारत अब दुनिया का तीसरा ऐसा देश बन गया है, जिसने निजी क्षेत्र में ऑर्बिटल लॉन्च करने की क्षमता हासिल की है। विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर ने इस ऐतिहासिक सफलता पर बधाई दी और इसे भारत के नए स्पेस युग की शुरुआत बताया।


डॉ. एस जयशंकर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, "भारत की स्पेस महत्वाकांक्षाएं नई ऊंचाइयों पर पहुंच गई हैं! आज स्काईरूट एयरस्पेस द्वारा विकसित विक्रम-1 का सफल लॉन्च वास्तव में ऐतिहासिक है। यह दर्शाता है कि जब भारत के युवा नवाचार और उद्यमिता के साथ पीएम नरेंद्र मोदी के सुधारों का समर्थन करते हैं, तो क्या कुछ हासिल किया जा सकता है।"


विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने भी एक्स पर लिखा, "भारत का अगला स्पेस युग शुरू हो गया है। स्काईरूट एयरोस्पेस द्वारा विकसित विक्रम-1 का सफल लॉन्च भारत की स्पेस यात्रा के लिए एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है। यह उपलब्धि हमारे युवाओं की उद्यमिता, मेहनत और दृढ़ संकल्प को दर्शाती है।"


'विक्रम-1' ने सफलतापूर्वक अपनी निर्धारित कक्षा (ऑर्बिट) प्राप्त कर ली है। इस सफलता के साथ, भारत ने निजी क्षेत्र में ऑर्बिटल लॉन्च की क्षमता हासिल करने वाला तीसरा देश बनने का गौरव प्राप्त किया है।


यह रॉकेट हैदराबाद स्थित स्काईरूट एयरोस्पेस द्वारा विकसित किया गया है। स्काईरूट ने अपने आधिकारिक एक्स अकाउंट पर बताया, "भारत के पहले निजी ऑर्बिटल रॉकेट 'विक्रम-1' ने अपनी निर्धारित कक्षा सफलतापूर्वक प्राप्त कर ली है। रॉकेट ने अपने अंतिम ईंधन दहन चरण को पूरा करते हुए पेलोड को पृथ्वी से लगभग 450 किलोमीटर की ऊंचाई पर स्थापित कर दिया।"


विक्रम-1 में तीन ठोस ईंधन चरण और एक तरल ऑर्बिटल एडजस्टमेंट मॉड्यूल शामिल हैं। इस मिशन का उद्देश्य 350 किलोग्राम तक के पेलोड को 60 डिग्री के झुकाव वाली 450 किलोमीटर ऊंची लो अर्थ ऑर्बिट (एलईओ) में स्थापित करना है।