भारत ने विक्रम दोराईस्वामी को चीन में नया राजदूत नियुक्त किया: क्या सुधरेंगे रिश्ते?
भारत का नया राजदूत: विक्रम दोराईस्वामी
भारत सरकार ने अनुभवी राजनयिक विक्रम दोराईस्वामी को चीन में भारत का नया राजदूत नियुक्त किया है। यह नियुक्ति ऐसे समय में हुई है जब भारत और चीन के बीच संबंधों को सुधारने की कोशिशें तेज हो गई हैं। पूर्वी लद्दाख में चार साल से अधिक समय तक चले सैन्य तनाव के बाद, दोनों देश अब संबंधों को सामान्य बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। विदेश मंत्रालय के अनुसार, दोराईस्वामी जल्द ही बीजिंग में अपने कार्यभार को संभालेंगे।
क्या भारत-चीन के रिश्ते सुधर रहे हैं?
साल 2020 में गलवान घाटी में हुई हिंसक झड़प के बाद भारत-चीन संबंधों में काफी गिरावट आई थी, जो दशकों में सबसे गंभीर मानी गई। हालांकि, हाल के महीनों में दोनों देशों ने बातचीत और कूटनीतिक प्रयासों के माध्यम से स्थिति को स्थिर करने की कोशिश की है। अक्टूबर 2024 में यह सैन्य गतिरोध प्रभावी रूप से समाप्त हो गया, जिसके बाद अब रिश्तों को पटरी पर लाने की प्रक्रिया जारी है।
विक्रम दोराईस्वामी का करियर
विक्रम दोराईस्वामी का करियर विविध और समृद्ध रहा है। दिल्ली विश्वविद्यालय से इतिहास में स्नातकोत्तर करने के बाद, उन्होंने एक वर्ष तक पत्रकारिता में भी कार्य किया। इसके बाद, वह भारतीय विदेश सेवा में शामिल हुए। 1994 में उनकी पहली तैनाती हांगकांग में तृतीय सचिव के रूप में हुई, जहां उन्होंने चीनी भाषा का अध्ययन किया और डिप्लोमा प्राप्त किया। इसके बाद, वह 1996 में बीजिंग गए, जहां उन्होंने चार साल तक कार्य किया।
प्रधानमंत्री कार्यालय में कार्य अनुभव
साल 2000 में, उन्हें विदेश मंत्रालय में प्रोटोकॉल उप प्रमुख बनाया गया। इसके बाद, उन्हें प्रधानमंत्री कार्यालय में जिम्मेदारी दी गई, जहां उन्होंने प्रधानमंत्री के निजी सचिव के रूप में भी कार्य किया। उन्होंने न्यूयॉर्क स्थित संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी मिशन और दक्षिण अफ्रीका के जोहानिसबर्ग में महावाणिज्य दूतावास में भी सेवाएं दी हैं।
दक्षिण एशियाई मामलों में अनुभव
नई दिल्ली लौटने के बाद, उन्होंने दक्षिण एशियाई क्षेत्रीय सहयोग संगठन (दक्षेस) से जुड़े मामलों को संभाला। बाद में, वह विदेश मंत्रालय में अमेरिका प्रभाग के संयुक्त सचिव बने। 2014 में, उन्हें उज्बेकिस्तान में भारत का राजदूत नियुक्त किया गया और फिर 2015 में दक्षिण कोरिया में भी उन्होंने इसी पद पर कार्य किया।
भाषाई कौशल
इसके अलावा, उन्होंने बांग्लादेश में उच्चायुक्त और ब्रिटेन में भारत के उच्चायुक्त के रूप में भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाई हैं। दोराईस्वामी मंदारिन, फ्रेंच और कुछ हद तक कोरियाई भाषा के जानकार हैं, जो उनकी कूटनीतिक भूमिका को और मजबूत बनाती है।