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भारत ने शेख हसीना के प्रत्यर्पण पर बड़ा बयान दिया

भारत ने पूर्व बांग्लादेशी प्रधानमंत्री शेख हसीना के प्रत्यर्पण के संबंध में एक महत्वपूर्ण बयान जारी किया है। विदेश मंत्रालय ने बताया कि बांग्लादेश से आया अनुरोध अभी विचाराधीन है और कानूनी प्रक्रियाओं के अनुसार निर्णय लिया जाएगा। शेख हसीना ने दिसंबर में स्वेच्छा से बांग्लादेश लौटने की योजना बनाई है, जहां वह अदालत में आत्मसमर्पण करेंगी। जानें इस मामले में और क्या जानकारी सामने आई है।
 

भारत का प्रत्यर्पण पर बयान


भारत ने पूर्व बांग्लादेशी प्रधानमंत्री शेख हसीना के प्रत्यर्पण के संबंध में महत्वपूर्ण जानकारी साझा की है। विदेश मंत्रालय ने शुक्रवार को बताया कि बांग्लादेश सरकार द्वारा भेजा गया प्रत्यर्पण अनुरोध अभी 'विचाराधीन' है और इस पर कानूनी प्रक्रियाओं के अनुसार निर्णय लिया जाएगा। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि भारत को प्रत्यर्पण का अनुरोध प्राप्त हुआ है और सभी कानूनी पहलुओं की समीक्षा की जा रही है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उचित कानूनी प्रक्रिया का पालन किया जाएगा।


अनुरोध का इतिहास

शेख हसीना अगस्त 2024 में छात्र आंदोलन के बाद भारत आ गई थीं और तब से नई दिल्ली में निवास कर रही हैं। बांग्लादेश की अंतरिम सरकार ने नवंबर 2025 में पहली बार भारत से उनके प्रत्यर्पण का औपचारिक अनुरोध किया था। इसके बाद, अप्रैल 2026 में बांग्लादेश के विदेश मामलों के सलाहकार खलीलुर रहमान ने भारत यात्रा के दौरान इस मांग को दोहराया।


शेख हसीना की वापसी की योजना

हाल ही में, शेख हसीना ने कहा कि वह दिसंबर में स्वेच्छा से बांग्लादेश लौटने की योजना बना रही हैं। एक समाचार एजेंसी को दिए इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि लौटते ही वह अदालत में आत्मसमर्पण करेंगी, चाहे उन्हें गिरफ्तारी या मौत का सामना करना पड़े। उन्होंने बताया कि उनके दल अवामी लीग के नेताओं और कार्यकर्ताओं पर लगातार दमन हो रहा है और यदि मृत्यु भी आए तो वह अपने देश की मिट्टी पर लौटना चाहेंगी, जहां उनके माता-पिता दफन हैं।


न्यायालय का फैसला

बांग्लादेश के अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायाधिकरण ने 2024 के छात्र आंदोलन के दौरान मानवता के खिलाफ अपराधों के मामले में शेख हसीना को दोषी ठहराते हुए मौत की सजा सुनाई है। इसी मामले में पूर्व गृह मंत्री असदुज्जमान खान कमाल को भी मृत्युदंड दिया गया है। न्यायालय ने शेख हसीना और कमाल की संपत्तियों को जब्त करने का आदेश भी दिया है। हालांकि, भारत ने केवल इतना कहा है कि प्रत्यर्पण संबंधी अनुरोध पर कानूनी प्रक्रिया के अनुसार विचार किया जा रहा है।