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भारत ने संयुक्त राष्ट्र में वीटो पावर के उपयोग पर उठाए महत्वपूर्ण सवाल

भारत के स्थायी प्रतिनिधि पर्वतनेनी हरीश ने संयुक्त राष्ट्र महासभा में वीटो पावर के उपयोग पर महत्वपूर्ण सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि इस अधिकार का प्रयोग केवल राजनीतिक लाभ के लिए नहीं होना चाहिए, बल्कि इसे अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा के लिए जिम्मेदारी से उपयोग किया जाना चाहिए। हरीश ने वीटो के उपयोग के आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि सुरक्षा परिषद में सुधार की आवश्यकता है। जानें इस मुद्दे पर भारत का क्या कहना है और वीटो पावर के उपयोग में जवाबदेही कैसे सुनिश्चित की जा सकती है।
 

वीटो पावर का जिम्मेदार उपयोग

न्यूयॉर्क: भारत के स्थायी प्रतिनिधि पर्वतनेनी हरीश ने संयुक्त राष्ट्र महासभा के पूर्ण सत्र में वीटो पावर के उपयोग पर भारत का दृष्टिकोण स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि इस अधिकार का प्रयोग अत्यंत सावधानी से किया जाना चाहिए, विशेषकर उन मामलों में जो अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा से संबंधित हैं। उनका यह भी कहना था कि इसका उपयोग केवल सीमित राजनीतिक लाभ के लिए नहीं होना चाहिए।


हरीश ने बताया कि वर्तमान में सुरक्षा परिषद के पांच स्थायी सदस्यों के पास वीटो का अधिकार है। भारत का मानना है कि यह अधिकार केवल विशेषाधिकार नहीं, बल्कि एक बड़ी जिम्मेदारी भी है। इसलिए, इसके उपयोग में जवाबदेही और संयम आवश्यक है।


उन्होंने वीटो के उपयोग के आंकड़ों का उल्लेख करते हुए कहा कि संयुक्त राष्ट्र की स्थापना के बाद से लगभग 200 प्रस्तावों पर 331 बार वीटो का प्रयोग किया गया है। उन्होंने यह भी बताया कि सुरक्षा परिषद के दो स्थायी सदस्यों ने पिछले साढ़े तीन दशकों से वीटो का प्रयोग नहीं किया है, जबकि अधिकांश वीटो का उपयोग केवल तीन स्थायी सदस्यों द्वारा किया गया है।


हरीश ने कहा कि 2022 में शुरू की गई वीटो पहल को जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम माना गया था। इसके तहत, सुरक्षा परिषद के किसी स्थायी सदस्य द्वारा वीटो का उपयोग किए जाने पर महासभा में बहस अनिवार्य की गई है, ताकि संबंधित देशों से सवाल पूछे जा सकें।


हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि महासभा के प्रस्ताव 76/262 के अपनाए जाने के बाद वीटो के व्यापक उपयोग का रिकॉर्ड इस पहल की उम्मीदों के विपरीत है। इससे यह स्पष्ट होता है कि केवल बहस और जवाबदेही की व्यवस्था शुरू करना इस समस्या का प्रभावी समाधान नहीं है।


भारतीय प्रतिनिधि ने कहा कि वीटो का मुद्दा सुरक्षा परिषद में सुधार से जुड़े पांच प्रमुख विषयों में से एक है, जिन पर अंतरसरकारी वार्ता (आईजीएन) के तहत चर्चा की जाती है।


उन्होंने कहा कि भारत महासभा के प्रस्ताव 76/262 की भावना और बड़े पैमाने पर अत्याचार की घटनाओं से जुड़े प्रयासों का समर्थन करता है। हालांकि, अब तक के अनुभव बताते हैं कि अलग-अलग मुद्दों पर छोटे-छोटे कदम उठाने से समस्या का स्थायी समाधान नहीं निकलेगा। इसके लिए सुरक्षा परिषद में व्यापक और प्रभावी सुधार आवश्यक हैं, ताकि वैश्विक शांति और सुरक्षा से जुड़े फैसलों में अधिक जवाबदेही सुनिश्चित की जा सके।