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भारत ने होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने की मांग की

भारत ने होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने की मांग की है, जिसमें विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों पर आवाजाही की तत्काल बहाली की आवश्यकता पर जोर दिया। इस संघर्ष में भारत ने अपने आठ नागरिकों को खोया है, जो कि इस मुद्दे को और भी गंभीर बनाता है। बैठक में कई देशों ने भाग लिया, लेकिन अमेरिका अनुपस्थित रहा। जानें इस महत्वपूर्ण बैठक के बारे में और भारत की स्थिति के बारे में अधिक जानकारी।
 

भारत की मांगें और अंतरराष्ट्रीय बैठक

नई दिल्ली। इजरायल, अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे संघर्ष को एक महीने से अधिक समय हो चुका है। इस दौरान, भारत ने होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने की मांग को तेज किया है। हाल ही में ब्रिटेन द्वारा आयोजित एक महत्वपूर्ण बैठक में कई देशों ने भाग लिया, जिसमें भारत का प्रतिनिधित्व विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने किया। उन्होंने बैठक में स्पष्ट रूप से कहा कि अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों पर आवाजाही को तुरंत बहाल किया जाना चाहिए और इसमें किसी भी प्रकार की रुकावट नहीं होनी चाहिए।

विदेश सचिव ने बताया कि इस युद्ध के कारण भारत ने अपने नागरिकों को खोया है, जो कि इस संघर्ष में सबसे अधिक प्रभावित हुआ है। बैठक में अमेरिका शामिल नहीं था, और इसका उद्देश्य होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने के लिए कूटनीतिक और राजनीतिक समाधान खोजना था।

विक्रम मिस्री ने कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य में रुकावट से भारत की ऊर्जा सुरक्षा पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत समुद्री रास्तों की सुरक्षा और स्वतंत्र नेविगेशन की आवश्यकता पर जोर दिया। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने भी कहा कि भारत की प्राथमिकता है कि होर्मुज जलडमरूमध्य में सुरक्षित और निर्बाध आवाजाही बहाल हो।

विदेश सचिव ने यह भी बताया कि इस संघर्ष में भारत के आठ नागरिकों की जान गई है, और भारत ही एकमात्र ऐसा देश है जिसने इस युद्ध में अपने लोगों को खोया है। इस युद्ध के कारण भारत को भारी नुकसान उठाना पड़ा है, जिसमें व्यापारी जहाजों पर हुए हमलों में तीन भारतीय नाविकों सहित कुल आठ भारतीयों की मौत हो चुकी है। बैठक के बाद, ब्रिटेन की गृह मंत्री इवेट कूपर ने कहा कि यह वैश्विक प्रयास इस बात का संकेत है कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग को फिर से खोलने के लिए गंभीर है और सैन्य कार्रवाई के बजाय कूटनीति पर जोर दे रहा है।