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भारत ने होर्मुज जलडमरूमध्य में वाणिज्यिक जहाजों पर हमलों की कड़ी निंदा की

भारत ने होर्मुज जलडमरूमध्य में वाणिज्यिक जहाजों पर हो रहे हमलों की कड़ी निंदा की है। इस मुद्दे पर भारत ने ऊर्जा सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय कानूनों के पालन की आवश्यकता पर जोर दिया। राजदूत पर्वतनेनी हरीश ने कहा कि ऐसे हमले व्यापार और नागरिकों की सुरक्षा के लिए खतरा हैं। भारत ने संतुलित रुख अपनाते हुए सुरक्षा परिषद में ईरान के खिलाफ प्रस्ताव पर रूस और चीन के वीटो के मामले में तटस्थता बनाए रखी। जानें इस महत्वपूर्ण मुद्दे पर भारत का क्या कहना है।
 

भारत की प्रतिक्रिया


पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्षों के बीच, भारत ने वाणिज्यिक जहाजों पर हो रहे हमलों के प्रति अपनी कड़ी आपत्ति व्यक्त की है, इसे पूरी तरह से अस्वीकार्य बताया है। भारत ने होर्मुज जलडमरूमध्य के महत्व को उजागर करते हुए कहा कि इस मार्ग से गुजरने वाले जहाजों की सुरक्षित और निर्बाध आवाजाही सुनिश्चित करना अत्यंत आवश्यक है, क्योंकि यह वैश्विक व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति के लिए महत्वपूर्ण है।


भारत का आधिकारिक बयान

संयुक्त राष्ट्र महासभा में भारत के स्थायी प्रतिनिधि, राजदूत पर्वतनेनी हरीश ने इस मुद्दे पर भारत का दृष्टिकोण प्रस्तुत करते हुए कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य देश के लिए ऊर्जा सुरक्षा और आर्थिक हितों के लिहाज से एक संवेदनशील क्षेत्र है। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी परिस्थिति में वाणिज्यिक जहाजों को सैन्य हमलों का निशाना बनाना स्वीकार्य नहीं है। इससे न केवल व्यापार प्रभावित होता है, बल्कि निर्दोष नागरिकों और चालक दल की जान भी खतरे में पड़ती है।


अंतरराष्ट्रीय कानूनों का पालन

भारत ने यह भी कहा कि अंतरराष्ट्रीय कानूनों का पालन अनिवार्य है। समुद्री मार्गों की सुरक्षा और वैश्विक व्यापार की निरंतरता बनाए रखना सभी देशों की सामूहिक जिम्मेदारी है। भारत ने अपील की कि इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग पर सामान्य स्थिति को जल्द से जल्द बहाल किया जाए, ताकि व्यापारिक गतिविधियां बिना किसी रुकावट के फिर से शुरू हो सकें।


भारतीय नाविकों की सुरक्षा

इसके अलावा, भारत ने युद्ध के दौरान जहाजों पर मौजूद भारतीय नाविकों की मौत पर गहरी चिंता व्यक्त की और उनके परिवारों के प्रति संवेदना प्रकट की। भारत ने दोहराया कि नागरिकों की सुरक्षा सर्वोपरि है और ऐसे हमलों से बचना सभी पक्षों के हित में है।


भारत का संतुलित रुख

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में ईरान के खिलाफ लाए गए प्रस्ताव पर रूस और चीन द्वारा किए गए वीटो के मामले में भारत ने संतुलित रुख अपनाया। भारत ने किसी भी पक्ष का खुलकर समर्थन या विरोध करने से परहेज किया और तटस्थता बनाए रखी।


यह मुद्दा तब सामने आया जब सुरक्षा परिषद में बहरीन के नेतृत्व में एक प्रस्ताव पेश किया गया, जिसमें ईरान से वाणिज्यिक जहाजों पर हमले रोकने और होर्मुज में जहाजों की स्वतंत्र आवाजाही सुनिश्चित करने की मांग की गई थी। हालांकि, रूस और चीन के वीटो के बाद यह प्रस्ताव पारित नहीं हो सका, जिसके चलते महासभा में इस विषय पर व्यापक चर्चा के लिए बहस आयोजित की गई।