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भारत-नेपाल सीमा विवाद: बातचीत से समाधान की कोशिश

नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल ने भारत के साथ सीमा विवाद को सुलझाने के लिए बातचीत की इच्छा व्यक्त की है। उन्होंने भारत की आर्थिक प्रगति की सराहना की और कहा कि नेपाल एक सकारात्मक दृष्टिकोण के साथ भारत के साथ संबंध स्थापित करना चाहता है। खनाल की हालिया यात्रा को महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जिसमें उन्होंने भारत के विदेश मंत्री से मुलाकात की और दोनों देशों के बीच सहयोग को बढ़ावा देने पर चर्चा की।
 

भारत और नेपाल के बीच सीमा विवाद

लिपुलेख दर्रे पर भारत और नेपाल के बीच चल रहे विवाद को समय-समय पर नेपाल में तूल दिया जाता रहा है। नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल, जो हाल ही में नई दिल्ली पहुंचे, ने कहा कि उनका देश इस मुद्दे का समाधान बातचीत के माध्यम से चाहता है। उन्होंने कहा कि हम अधिक राष्ट्रवाद दिखाने के बजाय, शांतिपूर्ण और डेटा-आधारित तरीके से समस्याओं का समाधान करना चाहते हैं।


महत्वपूर्ण बैठकें

शिशिर खनाल ने एक दिन पहले भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर से मुलाकात की, जहां दोनों नेताओं ने कई मुद्दों पर चर्चा की। नेपाल के नए प्रधानमंत्री बालेन शाह द्वारा सीमा विवाद पर दिए गए बयान के बाद, खनाल की तीन दिवसीय यात्रा को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।


समस्याओं का समाधान

कोई समस्या बहुत बड़ी नहीं होती


नेपाल के विदेश मंत्री ने कहा, 'जब हम खुले दिल से बातचीत करते हैं, तो कोई भी समस्या बड़ी नहीं होती और न ही कोई सीमा विवाद कठिनाई पैदा करता है। हम भारत को खुले दिल, स्पष्ट दृष्टिकोण और पारदर्शी एजेंडे के साथ देखते हैं।'


भारत की आर्थिक प्रगति की सराहना

भारत की आर्थिक तरक्की की तारीफ


शिशिर खनाल ने भारत की आर्थिक प्रगति की प्रशंसा की और कहा कि जब वे सीमा के पार देखते हैं, तो उन्हें एक उभरता हुआ भारत नजर आता है - एक ऐसा भारत, जिसने वैश्विक मंच पर खुद को एक गतिशील और तेजी से बढ़ती हुई टेक और आर्थिक महाशक्ति के रूप में स्थापित किया है।


भारत के साथ संबंधों की इच्छा

भारत के साथ नेपाल जुड़ना चाहता है


नेपाली विदेश मंत्री ने भारत के साथ जुड़ने की इच्छा व्यक्त की और कहा, 'हम इस उभरते भारत के साथ जुड़ना चाहते हैं, जो अत्याधुनिक तकनीक से लैस है। इसके बदले में, हम एक उम्मीदों से भरे नेपाल की ऊर्जा लेकर आते हैं।'


उन्होंने यह भी कहा कि काठमांडू में बनी नई सरकार भारत को 21वीं सदी की भू-राजनीति के जटिल और संवेदनशील दृष्टिकोण से नहीं देखना चाहती, बल्कि दोनों देशों के विकास के लिए आपसी लाभकारी संबंध स्थापित करना चाहती है।