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भारत-पाकिस्तान के बीच शांति की नई पहल: 117 हस्ताक्षरकर्ताओं का खुला पत्र

भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव को कम करने की मांग एक बार फिर उठी है। 117 प्रमुख नागरिकों और नेताओं ने एक खुला पत्र भेजकर दोनों प्रधानमंत्रियों से बातचीत शुरू करने और सामान्य संबंध बहाल करने की अपील की है। पत्र में शांति, संवाद और सहयोग पर जोर दिया गया है, जिससे दोनों देशों के लोगों को बेहतर भविष्य के अवसर मिल सकें। इस पहल में कई प्रमुख हस्तियों का समर्थन शामिल है।
 

भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव कम करने की अपील


नई दिल्ली: भारत और पाकिस्तान के बीच लंबे समय से चल रहे तनाव को समाप्त करने की आवश्यकता एक बार फिर से उठाई गई है। 100 से अधिक प्रमुख नागरिकों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और नेताओं ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ को एक खुला पत्र भेजा है, जिसमें दोनों देशों के बीच संवाद शुरू करने और सामान्य संबंधों को पुनर्स्थापित करने की मांग की गई है।


शांति और संवाद पर जोर

पत्र में यह उल्लेख किया गया है कि भारत और पाकिस्तान के बीच की लगातार दुश्मनी का सबसे अधिक प्रभाव आम जनता, विशेषकर युवाओं पर पड़ रहा है। तनाव के कारण रोजगार, शिक्षा, व्यापार और सांस्कृतिक आदान-प्रदान के अवसर सीमित हो रहे हैं। हस्ताक्षरकर्ताओं ने दोनों सरकारों से रिश्तों को सामान्य बनाने के लिए सकारात्मक कदम उठाने का अनुरोध किया है।


राजनयिक संबंधों को बहाल करने का सुझाव

खुले पत्र में नई दिल्ली और इस्लामाबाद में फिर से उच्चायुक्तों की नियुक्ति की मांग की गई है। इसके अलावा, सामान्य वीजा सेवाओं को फिर से शुरू करने, दोनों देशों के बीच हवाई संपर्क खोलने और लोगों के बीच संवाद बढ़ाने पर भी जोर दिया गया है। पत्र में धार्मिक यात्राओं, सांस्कृतिक कार्यक्रमों और शैक्षणिक आदान-प्रदान को बढ़ावा देने का सुझाव भी दिया गया है।


117 हस्ताक्षरकर्ताओं का समर्थन

'सेंटर फॉर पीस एंड प्रोग्रेस' द्वारा जारी इस पत्र पर भारत और पाकिस्तान के कुल 117 व्यक्तियों ने हस्ताक्षर किए हैं। भारत की ओर से इस पहल का समर्थन करने वालों में नेशनल कॉन्फ्रेंस के प्रमुख डॉ. फारूक अब्दुल्ला, पीडीपी प्रमुख महबूबा मुफ्ती, आरजेडी सांसद मनोज झा, एजेयूपी नेता हुमायूं कबीर और अन्य प्रमुख हस्तियां शामिल हैं।


रिश्तों में सुधार की अपील

पत्र में दोनों प्रधानमंत्रियों से अनुरोध किया गया है कि वे आपसी मतभेदों को बातचीत के माध्यम से सुलझाने के लिए ठोस और निरंतर प्रयास करें। हस्ताक्षरकर्ताओं का मानना है कि शांति, विश्वास और सहयोग का माहौल बनने से दोनों देशों के लोगों को बेहतर भविष्य और विकास के अधिक अवसर मिल सकते हैं।