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भारत में 11 नए फ्लाइंग स्कूलों की स्थापना, पायलट बनने का सपना होगा साकार

भारत में 11 नए फ्लाइंग स्कूलों की स्थापना से पायलट बनने का सपना साकार होगा। यह पहल युवाओं के लिए कमर्शियल पायलट बनने के अवसरों को बढ़ाएगी और विदेशी संस्थानों पर निर्भरता को कम करेगी। नागरिक उड्डयन मंत्रालय के अनुसार, अगले 10 वर्षों में 30 से 31 हजार नए पायलटों की आवश्यकता होगी। जानें इस नई पहल के बारे में और कैसे यह भारत के एविएशन सेक्टर को मजबूत करेगी।
 

नई उड़ान की शुरुआत

नई दिल्ली: भारतीय हवाई क्षेत्र में विमानों की संख्या के साथ-साथ पायलटों की कमी अब समाप्त होने वाली है। देश का एविएशन उद्योग तेजी से विकसित हो रहा है, जिससे युवाओं के लिए कमर्शियल पायलट बनने के अवसर भी बढ़ रहे हैं। अक्सर, पायलट बनने की इच्छा रखने वाले छात्रों को उच्च फीस और ट्रेनिंग के लिए विदेश जाने की आवश्यकता होती थी। लेकिन अब इस समस्या का स्थायी समाधान सामने आया है। देश में एविएशन सेक्टर को मजबूत करने और एयरलाइंस की बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए 11 नए फ्लाइंग स्कूल (फ्लाइंग ट्रेनिंग ऑर्गनाइजेशन - FTO) स्थापित किए जाएंगे।


एयरपोर्ट अथॉरिटी की पहल

भारत के नागरिक उड्डयन क्षेत्र में विस्तार के साथ कुशल पायलटों की कमी एक चुनौती बन गई थी। इस समस्या का समाधान करने के लिए एयरपोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (एएआई) ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। इस वर्ष फरवरी में शुरू की गई ई-टेंडर प्रक्रिया के तहत, सात विभिन्न एयरपोर्ट्स पर 11 नए फ्लाइंग ट्रेनिंग ऑर्गनाइजेशन के लिए टेंडर सफलतापूर्वक पूरा कर लिया गया है।


पायलटों की बढ़ती मांग

नागरिक उड्डयन मंत्रालय के अनुमानों के अनुसार, अगले 10 वर्षों में देश को लगभग 30 से 31 हजार नए पायलटों की आवश्यकता होगी। इसका मुख्य कारण यह है कि अगले पांच वर्षों में भारतीय एयरलाइंस कंपनियां लगभग 500 नए विमानों को अपने बेड़े में शामिल करने की योजना बना रही हैं। इसके अलावा, देश में लगभग 50 नए एयरपोर्ट्स के विकास की भी संभावना है। टाटा समूह के स्वामित्व वाली एयर इंडिया भी अगले 18 महीनों में 50 से 60 नए विमानों को अपने बेड़े में शामिल करने की तैयारी कर रही है।


घरेलू ट्रेनिंग का विस्तार

वर्तमान में, भारत में नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (डीजीसीए) से मान्यता प्राप्त 41 फ्लाइंग ट्रेनिंग ऑर्गनाइजेशन हैं, जो 63 फ्लाइंग बेस के माध्यम से सेवाएं प्रदान कर रहे हैं। इन 11 नए फ्लाइंग स्कूलों के खुलने से न केवल घरेलू ट्रेनिंग क्षमता में वृद्धि होगी, बल्कि भारतीय छात्रों की विदेशी संस्थानों पर निर्भरता भी कम होगी। प्रारंभिक चरण में, इन नए संस्थानों में 60 से 70 ट्रेनिंग विमान शामिल होंगे, और जब ये स्कूल अपनी पूरी क्षमता पर काम करेंगे, तो उनका बेड़ा 110 से 120 विमानों तक पहुंच सकता है।


सुलभ और किफायती प्रशिक्षण

भारत में पायलट प्रशिक्षण के प्रति युवाओं की रुचि लगातार बढ़ रही है। इसका प्रमाण डीजीसीए द्वारा जारी कमर्शियल पायलट लाइसेंस (सीपीएल) के आंकड़ों में भी देखा जा सकता है। 2018 में 640 सीपीएल जारी किए गए थे, जबकि 2024 में यह संख्या बढ़कर 1,628 हो गई है। हाल के दिनों में, विदेशी संस्थानों से ट्रेनिंग लेने वाले कैडेट्स को 615 सीपीएल और 2,309 स्टूडेंट पायलट लाइसेंस जारी किए गए हैं। अब रीजनल एयरपोर्ट्स पर शुरू होने वाले नए फ्लाइंग स्कूलों से छात्रों को अधिक सुलभ और किफायती ट्रेनिंग का विकल्प मिलेगा। यह पहल भारत के तेजी से विकसित होते एविएशन सेक्टर के लिए आवश्यक मानव संसाधन तैयार करने में महत्वपूर्ण साबित होगी।