भारत में 5.2 करोड़ अयोग्य वोटरों के नाम हटाए गए: चुनाव आयोग का SIR अभियान
नई दिल्ली में चुनाव आयोग की पहल
नई दिल्ली: भारत के चुनाव आयोग ने अपने विशेष अभियान, जिसे स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) कहा जाता है, के तहत 12 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की वोटर लिस्ट से लगभग 5.2 करोड़ अयोग्य मतदाताओं के नाम हटा दिए हैं। यह संख्या कुल वोटरों का लगभग 10.2 प्रतिशत है। आयोग का कहना है कि यह कदम वोटर लिस्ट की गुणवत्ता और सटीकता को बढ़ाने के लिए उठाया गया था।
अयोग्य वोटरों के नाम हटाने का कारण
इस प्रक्रिया में उन मतदाताओं के नाम हटाए गए जो अनुपस्थित थे, जिनकी मृत्यु हो चुकी थी, या जो किसी अन्य कारण से अयोग्य थे। इससे फर्जी वोटिंग की संभावनाएं कम हो गई हैं।
SIR अभियान का विस्तार
आयोग ने बताया कि SIR अभियान का पहला चरण बिहार में शुरू हुआ, इसके बाद इसे उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, गुजरात और तमिलनाडु सहित 11 अन्य राज्यों में लागू किया गया। इस दौरान कुल 51 करोड़ मतदाताओं की जांच की गई, जिसके परिणामस्वरूप 10.2 प्रतिशत नाम हटाए गए।
कौन से राज्यों में सबसे ज्यादा नाम हटाए गए?
आंकड़ों के अनुसार, अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में नाम हटाने का प्रतिशत सबसे अधिक 16.6 प्रतिशत रहा। इसके बाद उत्तर प्रदेश में 13.2 प्रतिशत और गुजरात में 13.1 प्रतिशत नाम हटाए गए। छत्तीसगढ़ में भी 11.3 प्रतिशत नाम हटाए गए।
SIR अभियान से प्राप्त जानकारी
इस अभियान के दौरान यह भी पता चला कि 13 करोड़ लोग अपने रजिस्टर्ड पते पर मौजूद नहीं थे, जबकि 3.1 करोड़ लोग दूसरे राज्यों में चले गए थे। इसके अलावा, वोटर लिस्ट में लगभग 6.5 करोड़ ऐसे मतदाता थे जिन्होंने कभी वोट नहीं डाला था।
नए नामों की वृद्धि
चुनाव आयोग ने वोटर लिस्ट में 2 करोड़ नए नाम भी जोड़े हैं। उत्तर प्रदेश में 92.4 लाख नए मतदाता जोड़े गए, इसके बाद तमिलनाडु में 35 लाख और केरल में 20.4 लाख नए नाम जोड़े गए।