भारत में अमेरिका के विदेश मंत्री की यात्रा पर चर्चा
अमेरिकी विदेश मंत्री का भारत दौरा
हाल ही में, अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने भारत का दौरा किया, जहां उनकी मुलाकात विदेश मंत्री एस जयशंकर के साथ मुंबई में हुई। इस दौरान, रूबियो ने देश के प्रमुख उद्योग समूहों के प्रतिनिधियों से भी बातचीत की। इसके बाद, वे गुजरात के जामनगर में रिफाइनरी का दौरा करने गए। इस दौरे के संदर्भ में, राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पर टिप्पणी की कि अमेरिका के विदेश मंत्री ने अपने कर्मचारियों को मुंबई बुलाया। कांग्रेस के अन्य नेताओं ने भी इसी तरह की टिप्पणियाँ की। हालांकि, राहुल की यह टिप्पणी पूरी तरह से सही नहीं थी। अतीत में, कई विदेशी अतिथियों के भारत आने पर दिल्ली से बाहर भी वार्ताएँ होती रही हैं।
इस संदर्भ में, यदि रूबियो भारत में अपने उद्योग समूहों या देश की अर्थव्यवस्था के लिए लॉबिंग कर रहे थे, तो विदेश मंत्री को उनके साथ द्विपक्षीय वार्ता का कार्यक्रम नहीं बनाना चाहिए था।
जब इस विषय पर एक मीडिया कार्यक्रम में जयशंकर से सवाल किया गया, तो उन्होंने चुटकी लेते हुए कहा कि ‘हम समझदार लोग हैं, इसलिए हमें समझदारी से बात करनी चाहिए’। इस तरह उन्होंने राहुल की टिप्पणियों को बचकाना बताया। लेकिन इसके बाद उन्होंने जो तुलना की, वह और भी बचकाना थी। उन्होंने 1972 में इंदिरा गांधी और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री जुल्फीकार अली भुट्टो के बीच शिमला में हुई मुलाकात का उदाहरण दिया। उन्होंने पूछा कि क्या उस समय भुट्टो को शिमला बुलाया गया था? यह सोचने वाली बात है कि भारत का विदेश मंत्री ऐसी बातें कर रहा है। उस समय 1971 में पाकिस्तान हार चुका था और भारत ने वहां के प्रधानमंत्री को समझौते के लिए बुलाया था। विदेश मंत्री को बेहतर उदाहरण देने चाहिए थे, लेकिन उनकी समझदारी में केवल शिमला समझौता ही आया।