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भारत में अमेरिकी और यूक्रेनी नागरिकों की गिरफ्तारी: म्यांमार में संदिग्ध गतिविधियों का मामला

भारत में एनआईए ने एक अमेरिकी और छह यूक्रेनी नागरिकों को गिरफ्तार किया है, जिन पर म्यांमार में जातीय समूहों को ड्रोन युद्ध और प्रशिक्षण देने का आरोप है। यह गिरफ्तारी दिल्ली, लखनऊ और कोलकाता एयरपोर्ट पर हुई। यूक्रेनी राजदूत ने जांच की निष्पक्षता की मांग की है, जबकि मिजोरम में संदिग्ध गतिविधियों पर चिंता बढ़ गई है। जानें इस मामले की पूरी जानकारी और इसके पीछे की कहानी।
 

गिरफ्तारी की जानकारी


रूस की खुफिया रिपोर्ट के आधार पर, राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने एक अमेरिकी नागरिक और छह यूक्रेनी नागरिकों को गिरफ्तार किया है। इन पर म्यांमार में जातीय समूहों को ड्रोन युद्ध, जैमिंग तकनीक और प्रशिक्षण देने का आरोप है। गिरफ्तारियां 13 मार्च को दिल्ली, लखनऊ और कोलकाता एयरपोर्ट पर की गईं। एनआईए की टीमें पिछले तीन महीनों से पूर्वोत्तर में इनकी खोज में थीं। दिल्ली की अदालत ने सभी आरोपियों को 27 मार्च तक एनआईए की हिरासत में भेज दिया है।


म्यांमार में अवैध गतिविधियों का आरोप

एनआईए के अनुसार, ये आरोपी पर्यटक वीजा पर भारत आए थे और गुवाहाटी पहुंचने के बाद बिना रेस्ट्रिक्टेड एरिया परमिट के मिजोरम गए। वहां से उन्होंने अवैध रूप से म्यांमार में प्रवेश किया। पूछताछ में उन्होंने स्वीकार किया कि उन्होंने कई बार म्यांमार के जातीय समूहों को प्रशिक्षण दिया है, जो म्यांमार की सेना के खिलाफ लड़ाई कर रहे हैं। कुल 14 लोगों का एक समूह था, जिसमें से बाकी आठ अभी म्यांमार में या भारत से बाहर जा चुके हो सकते हैं।


यूक्रेन और अमेरिका की प्रतिक्रिया

यूक्रेनी राजदूत ओलेक्सांद्र पोलिशचुक ने कहा कि जांच निष्पक्ष होनी चाहिए और यूक्रेन 2003 के आपसी कानूनी सहायता समझौते के तहत सहयोग के लिए तैयार है। उन्हें चिंता है कि क्या गिरफ्तार लोगों को समय पर मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया गया और क्या उन्हें यूक्रेनी भाषा में आरोप समझाए गए। कांसुलर एक्सेस अभी तक नहीं मिला है। अमेरिकी दूतावास ने मामले की जानकारी होने की पुष्टि की है, लेकिन अधिक टिप्पणी नहीं की। यूक्रेनी पक्ष सबूतों में किसी भी हेरफेर को रोकने की कोशिश कर रहा है।


मिजोरम में संदिग्ध गतिविधियों की बढ़ती चिंता

मिजोरम के मुख्यमंत्री लालदुहोमा ने मार्च 2025 में विधानसभा में बताया था कि जून से दिसंबर 2024 के बीच लगभग 2,000 विदेशी राज्य में आए, जिनमें से कई पर्यटक नहीं थे और बिना सूचना के म्यांमार चले गए। उन्होंने अमेरिका और ब्रिटेन के नागरिकों पर विद्रोहियों को हथियारों की ट्रेनिंग देने का आरोप लगाया। मैथ्यू वैनडाइक, जो खुद को पूर्व सैनिक और युद्ध संवाददाता बताते हैं, 'संस ऑफ लिबर्टी इंटरनेशनल' नामक मिलिट्री फर्म के संस्थापक हैं। एनआईए की जांच अभी प्रारंभिक चरण में है।


पूर्वोत्तर में सुरक्षा की स्थिति

इस घटना के बाद पूर्वोत्तर के सीमावर्ती क्षेत्रों में विदेशियों की गतिविधियों पर कड़ी निगरानी रखी जा रही है। एनआईए की टीमें मिजोरम और उसके आस-पास के क्षेत्रों में सक्रिय हैं। अधिकारियों का कहना है कि परमिट नियमों को सख्ती से लागू किया जाएगा ताकि ऐसी गतिविधियों की पुनरावृत्ति न हो। यह मामला भारत-म्यांमार सीमा की सुरक्षा और विदेशी हस्तक्षेप पर नई बहस को जन्म दे सकता है।