भारत में इन्फ्लूएंजा मामलों में वृद्धि: जानें क्या करें
इन्फ्लूएंजा की गतिविधियों में तेजी
नई दिल्ली: देश में इन्फ्लूएंजा (Flu) के मामलों में तेजी देखी जा रही है। पिछले तीन महीनों की तुलना में अगस्त में फ्लू की टेस्टिंग में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। हालिया आंकड़ों के अनुसार, फ्लू की पॉजिटिविटी दर लगभग 27% तक पहुंच गई है, जो इस सीजन में अब तक का सबसे ऊंचा स्तर है। यह संकेत करता है कि जैसे-जैसे मौसम बदल रहा है, फ्लू के मामलों में भी वृद्धि हो रही है।
दिल्ली-NCR में फ्लू की टेस्टिंग में वृद्धि
फ्लू की बढ़ती गतिविधि विशेष रूप से दिल्ली-NCR में देखी जा रही है। यहां की टेस्टिंग में लगभग 70% टेस्ट इसी क्षेत्र में किए गए हैं। विभिन्न शहरों में फ्लू पॉजिटिविटी दर इस प्रकार है: नोएडा में 17%, गाजियाबाद में 19%, दिल्ली में 16%, और गुरुग्राम में 13%। वहीं, मेरठ और जीरकपुर में यह दर 35% तक पहुंच गई है, जो इन क्षेत्रों में फ्लू की बढ़ती गतिविधि को दर्शाता है।
कोलकाता में पॉजिटिविटी दर में वृद्धि
दिल्ली-NCR के अलावा, कोलकाता भी फ्लू के मामलों में वृद्धि के लिए एक प्रमुख क्षेत्र बन गया है। हाल के हफ्तों में यहां फ्लू की पॉजिटिविटी दर लगभग 43% तक पहुंच गई है। ऐसे में मौसम के साथ बढ़ने वाले श्वसन संक्रमणों पर ध्यान देना आवश्यक हो गया है।
डेंगू और फ्लू के लक्षणों में भ्रम
इस समय केवल फ्लू ही चिंता का विषय नहीं है। डेंगू की पॉजिटिविटी दर भी बढ़कर लगभग 12% हो गई है। दोनों बीमारियों के लक्षण समान हो सकते हैं, जैसे बुखार, शरीर में दर्द और थकान। इसलिए, केवल लक्षणों के आधार पर बीमारी की पहचान करना सही नहीं है। आवश्यकता पड़ने पर डॉक्टर से सलाह और मेडिकल टेस्ट कराना जरूरी हो सकता है।
किसे अधिक सावधानी बरतनी चाहिए?
इन्फ्लूएंजा किसी भी उम्र के व्यक्ति को प्रभावित कर सकता है, लेकिन छोटे बच्चे, बुजुर्ग, गर्भवती महिलाएं और कमजोर इम्यूनिटी वाले लोग गंभीर जटिलताओं का शिकार हो सकते हैं। भीड़-भाड़ वाली जगहों पर रहने वाले लोगों को भी श्वसन संक्रमण से बचने के लिए सावधानी बरतनी चाहिए।
फ्लू के प्रमुख लक्षण
फ्लू के लक्षणों में बुखार, खांसी, गले में खराश, सिरदर्द, बदन दर्द और थकान शामिल हो सकते हैं। कुछ मामलों में सांस लेने में कठिनाई भी हो सकती है। यदि बुखार, खांसी या शरीर में दर्द लगातार बना रहता है या लक्षण गंभीर हो जाते हैं, तो इसे सामान्य वायरल समझकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। ऐसे मामलों में डॉक्टर से सलाह लेना बेहतर है।
घबराने की जरूरत नहीं, लेकिन लक्षणों को नजरअंदाज न करें
रेडक्लिफ लैब्स की लैब ऑपरेशन्स डायरेक्टर डॉ. सोनल सक्सेना के अनुसार, मौजूदा स्थिति में घबराने के बजाय जागरूक रहना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि कई मौसमी बीमारियां एक साथ फैल रही हैं, इसलिए लगातार बने रहने वाले लक्षणों पर ध्यान देना चाहिए और आवश्यकता पड़ने पर डॉक्टर की सलाह से मेडिकल टेस्ट करवाना चाहिए।