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भारत में ऊर्जा संकट: पीएम मोदी ने की उच्च-स्तरीय बैठक

पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के कारण भारत में ऊर्जा संकट गहरा गया है। पीएम मोदी ने इस स्थिति पर चर्चा करने के लिए एक उच्च-स्तरीय बैठक की, जिसमें पेट्रोलियम, गैस और बिजली जैसे क्षेत्रों की तैयारियों की समीक्षा की गई। अधिकारियों ने मौजूदा स्टॉक और आपूर्ति योजनाओं की जानकारी दी। गैस की कमी और इसके प्रभावों पर चिंता जताई गई है, जिसके चलते सरकार ने कड़े कदम उठाए हैं। जानें इस संकट से निपटने के लिए उठाए गए कदमों के बारे में।
 

ऊर्जा संकट की गंभीरता


पश्चिम एशिया में युद्ध की स्थिति और ईरान द्वारा होर्मुज़ जलडमरूमध्य को अवरुद्ध करने के कारण भारत में ऊर्जा संकट गहरा गया है। इस संकरे समुद्री मार्ग से लगभग 20% कच्चा तेल और प्राकृतिक गैस का परिवहन होता है। इस गंभीर परिस्थिति को ध्यान में रखते हुए, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को एक महत्वपूर्ण बैठक का आयोजन किया। इस बैठक में पेट्रोलियम, कच्चे तेल, प्राकृतिक गैस, बिजली और उर्वरक जैसे प्रमुख क्षेत्रों की तैयारियों और आपूर्ति योजनाओं की गहन समीक्षा की गई।


मंत्रालयों की रिपोर्ट

बैठक के दौरान, विभिन्न मंत्रालयों के वरिष्ठ अधिकारियों ने पीएम मोदी को मौजूदा स्टॉक स्तर, आयात पर निर्भरता और संभावित व्यवधानों से निपटने के लिए तैयार की गई आकस्मिक योजनाओं की जानकारी दी। सरकार का मुख्य ध्यान देशभर में आवश्यक संसाधनों की निर्बाध आपूर्ति श्रृंखला, स्थिर लॉजिस्टिक्स और कुशल वितरण सुनिश्चित करने पर है।


गैस की कमी पर चिंता

राजनीतिक हलकों और आम जनता के बीच गैस की बढ़ती कमी सबसे बड़ी चिंता का विषय बन गई है। भारत एलपीजी और प्राकृतिक गैस के लिए खाड़ी देशों पर अत्यधिक निर्भर है। होर्मुज़ के आसपास के तनाव के कारण जहाजों की आवाजाही में देरी हो रही है, जिससे कई टैंकर फंस गए हैं और आपूर्ति में बाधा उत्पन्न हो रही है। इसके परिणामस्वरूप, एलपीजी की खपत में भारी गिरावट आई है, जिसका असर अब जमीनी स्तर पर भी स्पष्ट हो रहा है।


सरकार के कड़े कदम

इस संकट से निपटने के लिए सरकार ने कड़े कदम उठाते हुए घरेलू एलपीजी सप्लाई और आवश्यक क्षेत्रों को प्राथमिकता देने का निर्णय लिया है। इसके चलते कमर्शियल उपयोग पर पाबंदियां लगाई गई हैं, जिससे कई रेस्टोरेंट और खाने की जगहें आंशिक या पूरी तरह से बंद हो गई हैं। हालांकि, आम जनता के लिए राहत की बात यह है कि वैश्विक अस्थिरता के बावजूद प्रमुख शहरों में ईंधन की कीमतें काफी हद तक स्थिर बनी हुई हैं।