भारत में एआई समिट: तकनीकी भविष्य की नई संभावनाएं
इंडिया एआई समिट की चर्चा
राजीव रंजन तिवारी | इंडिया एआई समिट ने भारत के तकनीकी भविष्य के लिए महत्वपूर्ण निवेश की घोषणाओं का मंच प्रदान किया। इस समिट में वैश्विक तकनीकी कंपनियों के बीच प्रतिस्पर्धा और कुछ प्रमुख व्यक्तियों की अनुपस्थिति ने भी ध्यान आकर्षित किया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में आयोजित इस कार्यक्रम में रिलायंस और गूगल जैसी कंपनियों ने भारत में अपने निवेश की घोषणा की। वहीं, सिलिकॉन वैली के प्रतिद्वंद्वियों के बीच की खींचतान और बिल गेट्स की अनुपस्थिति ने भी चर्चा का विषय बना।
एक दिलचस्प घटना तब हुई जब पीएम मोदी ने मंच पर उपस्थित 13 कॉर्पोरेट लीडर्स से एआई एकता प्रदर्शित करने के लिए हाथ उठाने का अनुरोध किया। हालांकि, ओपनएआई के सैम ऑल्टमैन और एंथ्रोपिक के डारियो आमोदेई ने एक-दूसरे से दूरी बनाए रखी। यह दृश्य सोशल मीडिया पर वायरल हो गया, जिसे एआई कोल्ड वॉर का नाम दिया गया।
समिट में एक और बड़ा झटका तब लगा जब बिल गेट्स ने अपने मुख्य भाषण से कुछ घंटे पहले ही नाम वापस ले लिया। गेट्स फाउंडेशन ने इसे सावधानीपूर्वक विचार के बाद लिया गया निर्णय बताया, लेकिन कोई स्पष्ट कारण नहीं दिया। उनकी अनुपस्थिति ने कई कयासों को जन्म दिया।
हालांकि, समिट ने भारत के एआई इकोसिस्टम के लिए 200 बिलियन डॉलर से अधिक के निवेश के वादे किए। रिलायंस के मुकेश अंबानी ने अगले सात वर्षों में एआई क्षेत्र में 110 बिलियन डॉलर का निवेश करने की घोषणा की। गूगल के सुंदर पिचाई ने विशाखापत्तनम में एक नया एआई हब स्थापित करने की योजना बनाई।
समिट में कुछ कुप्रबंधन की खबरें भी आईं, जैसे कि गलगोटिया यूनिवर्सिटी द्वारा एक चीनी रोबोट डॉग को अपने उत्पाद के रूप में पेश करना। इस पर विवाद खड़ा हो गया और यूनिवर्सिटी को माफी मांगनी पड़ी।
गलगोटिया यूनिवर्सिटी ने सफाई दी कि उनके प्रतिनिधि को तकनीकी जानकारी सही तरीके से नहीं मिली थी। यूनिवर्सिटी ने कहा कि उनका उद्देश्य किसी भी तरह से इनोवेशन को गलत तरीके से पेश करना नहीं था।
इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट ने सकारात्मक और नकारात्मक दोनों प्रकार की चर्चाएं बटोरीं। अब यह देखना है कि भारत इस समिट से किस प्रकार लाभ उठाता है।