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भारत में कैंसर उपचार में इम्यूनोथेरेपी का नया युग: सस्ती दवाओं से बढ़ी उम्मीदें

भारत में कैंसर उपचार में इम्यूनोथेरेपी का एक नया युग शुरू हो चुका है, जहां सस्ती दवाओं के आने से मरीजों की पहुंच में सुधार हुआ है। टाटा मेमोरियल सेंटर के डॉक्टरों के अनुसार, निवोलुमैब के बायोसिमिलर संस्करण ने उपचार की लागत को कम किया है, जिससे मरीजों को बेहतर उपचार मिल रहा है। इस लेख में जानें कि कैसे इम्यूनोथेरेपी ने कैंसर के इलाज में नई उम्मीदें जगाई हैं और इसके प्रभावी परिणामों के बारे में।
 

कैंसर उपचार में सकारात्मक बदलाव


नई दिल्ली: देश में कैंसर के इलाज में एक महत्वपूर्ण और सकारात्मक परिवर्तन देखने को मिल रहा है। पिछले छह महीनों में चिकित्सक पहले से कहीं अधिक मरीजों को इम्यूनोथेरेपी का सुझाव दे रहे हैं। यह आधुनिक कैंसर उपचार का एक अत्यधिक प्रभावी तरीका है, लेकिन इसकी ऊंची कीमत के कारण आम मरीज इससे दूर रहते थे।


सस्ती दवा का प्रभाव

इस बदलाव का मुख्य कारण प्रमुख इम्यूनोथेरेपी दवा 'निवोलुमैब' के सस्ते बायोसिमिलर संस्करण का बाजार में आना है। टाटा मेमोरियल सेंटर (TMC) के चिकित्सकों के अनुसार, यह दवा लगभग 25 प्रकार के ट्यूमर और 100 से अधिक कैंसर में प्रभावी है। भारतीय अनुसंधान ने यह भी दर्शाया है कि कुछ मामलों में कम डोज भी भारतीय मरीजों पर बेहतर परिणाम देती है, जिससे खर्च में कमी आती है।


उपचार की पहुंच में वृद्धि

कोकिलाबेन धीरूभाई अंबानी अस्पताल के डॉ. इमरान शेख के अनुसार, सस्ती दवा के आने के बाद पिछले छह महीनों में उनके प्रिस्क्रिप्शन में 50 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि हुई है। पहले जहां एक साइकिल पर एक लाख रुपये से अधिक खर्च होता था, वहीं अब मरीज 30 हजार रुपये में आसानी से इलाज करा रहे हैं।


उम्मीद की नई किरण

2022 में TMC की एक अध्ययन में पाया गया था कि इम्यूनोथेरेपी के योग्य मरीजों में से केवल 2.8 प्रतिशत को ही यह उपचार मिल पा रहा था। अब यह आंकड़ा तेजी से बढ़ रहा है। TMC परेल के मेडिकल ऑन्कोलॉजी प्रमुख डॉ. कुमार प्रभास के अनुसार, इस थेरेपी ने जानलेवा कैंसर में जीवन की उम्मीद को बढ़ा दिया है। स्किन कैंसर में पहले 100 में से केवल 5 मरीज लंबे समय तक जीवित रहते थे, अब यह दर 50 प्रतिशत तक पहुंच गई है।


कीमतों में कमी की संभावना

हालांकि, चुनौतियां अभी भी मौजूद हैं। भारत में केवल 7 चेकपॉइंट इनहिबिटर दवाएं उपलब्ध हैं, जबकि चीन में 35 हैं। NPPA ने 8 नवंबर से 137 एंटी-कैंसर दवाओं पर ट्रेड मार्जिन कैप लगाया है, जिससे सालाना 2500 करोड़ रुपये की बचत की उम्मीद है। लेकिन विशेषज्ञ के.एम. गोपीकुमार का कहना है कि कई अस्पताल अपने मेडिकल स्टोर से दवा खरीदने की शर्त रखते हैं, जिससे महंगी ओरिजिनल दवाएं ही उपलब्ध होती हैं।


अच्छी खबर यह है कि निवोलुमैब के चार और सस्ते संस्करण आने वाले हैं, जिससे इसकी कीमत 30 हजार से घटकर 10 हजार रुपये तक आ सकती है, लेकिन यह अस्पतालों के रवैये पर निर्भर करेगा।