भारत में कॉन्सर्ट इवेंट्स पर प्रशासन की नई पाबंदियाँ
कॉन्सर्ट्स पर प्रशासन की नजर
पुलिस उन कॉन्सर्ट्स पर ध्यान केंद्रित कर रही है, जहां शराब के सेवन के साथ-साथ ड्रग्स के उपयोग का आरोप लगाया गया है। प्रशासन ने अब इन आयोजनों के लिए नो-अल्कोहल की शर्त लागू कर दी है, जिससे इन इवेंट्स की लोकप्रियता में कमी आई है।
लगभग डेढ़ साल पहले, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत में लाइव म्यूजिक और अन्य इवेंट्स की संभावनाओं पर जोर दिया था। इस वर्ष संसद में प्रस्तुत आर्थिक सर्वेक्षण में इस क्षेत्र को विकास के एक उभरते इंजन के रूप में दर्शाया गया। रिपोर्ट में इसे 'ऑरेंज इकॉनमी' का हिस्सा बताया गया, जिसमें कहा गया कि 2024 तक भारत का लाइव एंटरटेनमेंट सेक्टर 10,000 करोड़ रुपये से अधिक हो जाएगा। कोल्डप्ले, डुआ लिपा, लिनकिन पार्क और मरून-5 जैसे बैंड्स के इवेंट्स में उमड़ती भीड़ ने इस उद्योग के विकास की उम्मीदें बढ़ा दी थीं।
हालांकि, हाल की घटनाओं ने इस उद्योग की चमक को कम कर दिया है। मुंबई में एक इवेंट के दौरान नशे के ओवरडोज से दो छात्रों की मौत ने अधिकारियों को सतर्क कर दिया। इसके बाद पुलिस ने कार्रवाई शुरू की, जिससे कई इवेंट्स को अचानक रद्द करना पड़ा। आयोजकों को करोड़ों रुपये का नुकसान हुआ है और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रसिद्ध कलाकारों के कार्यक्रमों को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। पुलिस मुख्य रूप से उन आउटडोर इवेंट्स पर ध्यान दे रही है, जहां शराब के सेवन के साथ मादक पदार्थों का उपयोग किया जाता है। जानकारों का कहना है कि नो-अल्कोहल की शर्त लागू होने से इन इवेंट्स की चमक कम हो गई है। पहले ही चेतावनी दी गई थी कि भारत में बड़े पैमाने पर कॉन्सर्ट आयोजित करने के लिए पर्याप्त आधुनिक स्टेडियम या ऑडिटोरियम नहीं हैं। भीड़ प्रबंधन और सुरक्षा मानकों का पालन करना भी एक चुनौती है। इन सभी समस्याओं के बावजूद कॉन्सर्ट इकॉनमी का गुणगान शुरू कर दिया गया था। अब ये चुनौतियाँ और भी गंभीर हो गई हैं, खासकर ईरान युद्ध के कारण बढ़ी महंगाई के चलते।