भारत में खरीफ फसलों की बुवाई में देरी, अल नीनो का खतरा
खरीफ फसलों की बुवाई में देरी
इस वर्ष धान जैसी खरीफ फसलों की बुवाई में देरी हो रही है। मॉनसून की गति अभी तक धीमी है, जिससे देश के जलाशयों में पानी की कमी हो गई है। इस स्थिति के कारण बुवाई प्रभावित हो रही है और किसानों की चिंताएं बढ़ रही हैं। अनुमान है कि लगभग 200 जिलों पर अल नीनो का नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा, जिससे खेती पर गंभीर असर होगा। सूखे की आशंका के चलते कई किसान बुवाई करने से हिचकिचा रहे हैं।
मौसम विभाग की चेतावनी
भारतीय मौसम विभाग ने 29 मई को बताया था कि इस बार साउथ-वेस्ट मॉनसून से सामान्य से कम बारिश होने की संभावना है। अब यह कहा जा रहा है कि बारिश में लगभग 60 प्रतिशत की कमी आ सकती है, जिससे कई जिलों में सूखे की स्थिति उत्पन्न हो सकती है। इस बीच, केंद्रीय कृषि मंत्रालय ने इंडियन काउंसिल ऑफ एग्रीकल्चरल रिसर्च (ICAR) और राज्य कृषि विश्वविद्यालयों से कहा है कि अल नीनो के मद्देनजर अलग योजनाएं तैयार करें।
सैकड़ों जिलों पर संकट
मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार, 150 से 200 जिले ऐसे हैं जिनकी स्थिति गंभीर है। मराठवाड़ा, नॉर्थ कर्नाटक बेल्ट, राजस्थान, गुजरात, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखंड, बिहार और पूर्वी उत्तर प्रदेश के जिलों में सामान्य से कम बारिश होने की संभावना है। तेलंगाना और दक्षिण भारत के तटीय क्षेत्रों को छोड़कर, देश के अन्य हिस्सों में भी कम बारिश की आशंका है।
बुवाई की गति में कमी
पानी की कमी और बारिश की अनुपस्थिति के कारण धान की बुवाई की गति धीमी हो गई है। 5 जून तक केवल 72.5 लाख हेक्टेयर में बुवाई हुई है, जो पिछले वर्ष की तुलना में 2 लाख हेक्टेयर कम है। ओडिशा, छत्तीसगढ़, हरियाणा, कर्नाटक, महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों में मिट्टी में नमी की कमी के कारण बुवाई संभव नहीं हो रही है। लाखों किसान अब भी बारिश का इंतजार कर रहे हैं।
जलाशयों में पानी की कमी
केंद्रीय जल आयोग की रिपोर्ट के अनुसार, 11 जून तक देश के 166 बड़े जलाशयों में केवल 28.28 प्रतिशत पानी बचा है, जो पिछले वर्ष की तुलना में 8.17 प्रतिशत कम है। दक्षिण भारत के राज्यों में पानी की स्थिति और भी खराब है, जहां केवल 20.98 प्रतिशत पानी बचा है। यदि आने वाले दिनों में बारिश नहीं होती है, तो जलाशयों में पानी की कमी और बढ़ सकती है।