भारत में गरीबी और रोजगार की स्थिति: एक नई रिपोर्ट का विश्लेषण
भारत में गरीबी में कमी
पिछले दस वर्षों में भारत में गरीबी में कमी आई है। विश्व बैंक की एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत ने उन देशों में स्थान बनाया है, जहां गरीबी घटाने में सबसे तेज प्रगति हुई है। इस सुधार का मुख्य कारण लोगों की खर्च करने की क्षमता में वृद्धि, रोजगार के अवसरों में इजाफा और सरकारी योजनाओं जैसे खाद्य सब्सिडी हैं। विशेष रूप से, महिलाओं की कार्यबल में भागीदारी ने परिवारों में कमाने वालों की संख्या बढ़ाई है।
रोजगार के अवसरों में वृद्धि
रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत में रोजगार के अवसर बढ़े हैं, लेकिन लोगों की आय में उसी अनुपात में सुधार नहीं हुआ है। 2017 से 2023 के बीच, देश में लगभग 13.4 करोड़ नए रोजगार सृजित हुए, जो काम करने की उम्र की जनसंख्या में वृद्धि के लगभग दोगुने हैं। फिर भी, महंगाई के प्रभाव को हटाने के बाद वास्तविक आय स्थिर बनी हुई है।
गरीबी का प्रभाव
रिपोर्ट के अनुसार, गरीबी का प्रभाव उन परिवारों पर अधिक है, जिनकी शिक्षा कम है, संपत्ति सीमित है और स्थायी रोजगार के अवसर नहीं हैं। 2023 में, सबसे अधिक कमाई करने वाले 10% कामकाजी लोगों की औसत आय, सबसे कम कमाई करने वाले 10% कामकाजी लोगों की तुलना में लगभग 13 गुना अधिक थी।
भारत में रोजगार बाजार की स्थिति
रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि ग्रामीण महिलाओं की कार्यबल में भागीदारी ने रोजगार में वृद्धि में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। हालांकि, इस वृद्धि का अधिकांश हिस्सा कम उत्पादकता वाले कार्यों में हुआ है, जिससे आय में सुधार नहीं हुआ। इसके अलावा, युवाओं के लिए नौकरी पाना एक चुनौती बना हुआ है।
भारत में रोजगार की स्थिति काफी हद तक स्थिर है। वित्त वर्ष 2026 की पहली तिमाही से वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही के बीच काम करने वालों और काम की तलाश करने वालों की दर में कोई महत्वपूर्ण बदलाव नहीं आया।
युवाओं में बेरोजगारी
हालांकि, इस दौरान युवाओं में बेरोजगारी की दर 14.6% से बढ़कर 15.9% हो गई, विशेष रूप से ग्रामीण युवा महिलाओं में यह समस्या अधिक देखने को मिली। रोजगार के अवसर बढ़ने के बावजूद, महंगाई के प्रभाव को हटाकर देखी जाने वाली आय में कोई विशेष वृद्धि नहीं हुई। इसका कारण यह है कि रोजगार में वृद्धि मुख्य रूप से ऐसे कार्यों में हुई है, जहां उत्पादकता कम है.
भारत में गरीबी की स्थिति
विश्व बैंक की अक्टूबर 2026 की रिपोर्ट के अनुसार, 2023 में 4.20 डॉलर प्रतिदिन की गरीबी रेखा पर ग्रामीण क्षेत्रों में गरीबी दर 19.3% थी, जबकि शहरी क्षेत्रों में यह 8.6% थी। रिपोर्ट में कहा गया है कि गांवों में उत्पादकता कम है और खेती से अलग बेहतर रोजगार के अवसर सीमित हैं। आंकड़ों के अनुसार, 2011 से 2023 के बीच 4.20 डॉलर प्रतिदिन की गरीबी रेखा से नीचे रहने वाली जनसंख्या का हिस्सा 57.7% से घटकर 16.1% रह गया। इस दौरान लगभग 49.6 करोड़ लोग इस गरीबी रेखा से ऊपर आए।
आर्थिक असमानता की चुनौती
हालांकि, आय में असमानता अब भी एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। 2023 में सबसे अधिक कमाई करने वाले 10% कामगारों की मध्य आय, सबसे कम कमाई करने वाले 10% कामगारों की तुलना में लगभग 13 गुना अधिक थी। इसका अर्थ है कि कम आय वाले और उच्च आय वाले कामगारों के बीच बड़ा अंतर है। इस प्रकार, देश में रोजगार बढ़ने के बावजूद सभी कामगारों को समान आर्थिक लाभ नहीं मिला। रोजगार के अवसरों के साथ-साथ आय का यह अंतर भारत के जॉब मार्केट की एक महत्वपूर्ण चुनौती है।