भारत में गैस आपूर्ति को लेकर चिंताएं: सरकार ने दी जानकारी
नई दिल्ली में गैस आपूर्ति की स्थिति
नई दिल्ली: पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष का असर अब वैश्विक ऊर्जा बाजार पर पड़ रहा है, जिससे भारत में ईंधन और गैस की उपलब्धता को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं। इस संदर्भ में, पेट्रोलियम मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने देशवासियों को वर्तमान स्थिति से अवगत कराया। उन्होंने बताया कि देश में संसाधनों की कोई कमी नहीं है, लेकिन अनावश्यक भय के कारण बुकिंग में भारी वृद्धि हुई है, जो व्यवस्था पर दबाव डाल रही है।
गैस सिलेंडरों की बुकिंग में वृद्धि
संयुक्त सचिव ने जानकारी दी कि सामान्यतः देश में प्रतिदिन 50 से 55 लाख गैस सिलेंडरों की बुकिंग होती है, लेकिन हाल के दिनों में यह संख्या बढ़कर 75 से 76 लाख तक पहुंच गई है। उन्होंने कहा कि यह वृद्धि वास्तविक मांग के कारण नहीं, बल्कि भविष्य की चिंता और घबराहट के कारण है। सुजाता शर्मा ने नागरिकों से अपील की है कि वे अफवाहों पर विश्वास न करें और केवल आवश्यकता के अनुसार ही बुकिंग करें।
सहायता केंद्रों का सुधार
बढ़ती शिकायतों को देखते हुए, तेल विपणन कंपनियों ने अपने कॉल सेंटरों को अपग्रेड किया है। अब कॉल सेंटर में सीटों की संख्या 400 कर दी गई है और टेलीफोन लाइनों की संख्या भी 50 तक बढ़ाई गई है। इसका उद्देश्य ग्राहकों की समस्याओं का त्वरित समाधान करना और उन्हें सही जानकारी प्रदान करना है, ताकि वे बिचौलियों के झांसे में न आएं।
कालाबाजारी पर सख्त कार्रवाई
संकट के समय मुनाफाखोरी को रोकने के लिए सरकार पूरी तरह से सतर्क है। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय के सचिव ने उपभोक्ता मामलों के विभाग के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक की, जिसमें सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभागों के सचिव शामिल हुए। सरकार ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि गैस की होर्डिंग या ब्लैक मार्केटिंग करने वालों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी और निगरानी बढ़ा दी गई है।
आपूर्ति की निरंतर निगरानी
सरकार केवल पैनिक कंट्रोल पर ध्यान नहीं दे रही, बल्कि सप्लाई चेन को सुचारू बनाए रखने पर भी ध्यान केंद्रित कर रही है। राज्यों के सचिवों को मौजूदा स्थिति से विस्तार से अवगत कराया गया है, ताकि वे अपने क्षेत्रों में सुचारू वितरण सुनिश्चित कर सकें। पेट्रोलियम मंत्रालय लगातार वैश्विक घटनाक्रमों और घरेलू स्टॉक की समीक्षा कर रहा है। प्रशासनिक स्तर पर यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि युद्ध के बावजूद आम जनता को रसोई गैस के लिए परेशान न होना पड़े।
सुजाता शर्मा ने दोहराया कि लोगों का सहयोग इस समय अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने मीडिया के माध्यम से जनता तक यह संदेश पहुंचाया है कि संयम ही व्यवस्था को बनाए रखने में मदद कर सकता है। सरकार संसाधनों का न्यायपूर्ण वितरण करने के लिए प्रतिबद्ध है। पैनिक बाइंग न केवल दूसरों के लिए समस्या पैदा करती है, बल्कि बाजार में कृत्रिम कमी का माहौल भी बनाती है। सही सूचनाओं का प्रसार ही इस ऊर्जा चुनौती का सही समाधान है।