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भारत में जासूसी नेटवर्क का खुलासा: 18 गिरफ्तारियां और चौंकाने वाले तथ्य

भारत में एक जासूसी नेटवर्क का खुलासा हुआ है, जिसमें 18 संदिग्धों की गिरफ्तारी हुई है। ये लोग पाकिस्तान में बैठे आकाओं के इशारे पर काम कर रहे थे और सनातन वेशभूषा का सहारा लेकर देश विरोधी गतिविधियों में संलग्न थे। जांच में कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं, जैसे कि आरोपियों ने अपनी पहचान छिपाने के लिए हिंदू नामों का इस्तेमाल किया। जानें इस मामले की पूरी जानकारी और इसके पीछे की साजिश।
 

जासूसी नेटवर्क का बड़ा खुलासा


नई दिल्ली: देशभर में एक जासूसी नेटवर्क का खुलासा हुआ है, जिसमें कई संदिग्धों की गिरफ्तारी के बाद कई चौंकाने वाली जानकारियां सामने आई हैं। जांच एजेंसियों के अनुसार, यह नेटवर्क पाकिस्तान में स्थित आकाओं के निर्देश पर कार्य कर रहा था, और भारत में उनके सहयोगी सनातन वेशभूषा का सहारा लेकर देश विरोधी गतिविधियों में संलग्न थे।


गिरफ्तारियों की संख्या

इस मामले में पुलिस ने अब तक 18 संदिग्धों को गिरफ्तार किया है, जिनमें विभिन्न राज्यों के लोग शामिल हैं। इसके साथ ही, छह नाबालिगों के भी शामिल होने की जानकारी मिली है। जांच एजेंसियां इस नेटवर्क के पीछे की साजिश और इसके अंतरराष्ट्रीय संबंधों की गहराई से जांच कर रही हैं।


जांच में सामने आए तथ्य

सूत्रों के अनुसार, पाकिस्तान में सरफराज उर्फ जोरा सिंह, शहजाद उर्फ भट्टी और वकार उर्फ विक्की जट जैसे लोग इस नेटवर्क का संचालन कर रहे थे। ये लोग विभिन्न तरीकों से भारत में जासूसी गतिविधियों को अंजाम देने के लिए निर्देश दे रहे थे।


जांच में यह भी पता चला है कि आरोपी जम्मू कश्मीर, लेह लद्दाख और अन्य संवेदनशील क्षेत्रों में जाकर रेकी करने की योजना बना रहे थे। कुछ मामलों में, उन्होंने धार्मिक स्थलों और भीड़भाड़ वाले स्थानों को भी निशाना बनाने की कोशिश की।


इसके अलावा, एजेंसियां लव जिहाद के एंगल की भी जांच कर रही हैं। आशंका है कि आरोपियों ने अपनी पहचान बदलकर केवल जासूसी ही नहीं, बल्कि अन्य गतिविधियों को भी अंजाम देने का प्रयास किया।


एक मामले में, एक आरोपी अपनी गर्लफ्रेंड के संपर्क में रहने के लिए नकली नाम का उपयोग कर रहा था, जिससे उसकी असली पहचान छिपी रहे। जांच एजेंसियां इस तरह के सभी पहलुओं को गंभीरता से देख रही हैं।


आरोपियों की गतिविधियों का दायरा

रिपोर्ट के अनुसार, आरोपी हरिद्वार, ऋषिकेश और अन्य धार्मिक स्थलों पर भी गए थे, जहां उन्होंने भीड़ और सुरक्षा व्यवस्था की जानकारी इकट्ठा की। इसके अलावा, राजस्थान और अन्य क्षेत्रों में भी उनकी गतिविधियों के सबूत मिले हैं।


जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपी वीओआईपी तकनीक का उपयोग कर अपने आकाओं से संपर्क में रहते थे, जिससे उनकी लोकेशन छिपी रहती थी।