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भारत में जेंडर इक्वेलिटी: रिपोर्ट से खुलासा

हाल ही में जारी ग्लोबल जेंडर गैप रिपोर्ट 2026 में भारत की जेंडर इक्वेलिटी की स्थिति पर चिंता जताई गई है। रिपोर्ट के अनुसार, भारत 145 देशों में 131वें स्थान पर है, और महिलाओं की श्रम भागीदारी केवल 34% है। शिक्षा और स्वास्थ्य में सुधार के बावजूद, नौकरी और राजनीति में महिलाओं की भागीदारी में कमी बनी हुई है। जानें इस रिपोर्ट में और क्या खुलासे हुए हैं और भारत में जेंडर गैप को भरने के लिए क्या कदम उठाने की आवश्यकता है।
 

महिला-पुरुष समानता की आवश्यकता

महिला और पुरुषों के बीच समानता, जिसे जेंडर इक्वेलिटी कहा जाता है, समाज और देश की प्रगति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। हाल ही में वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम (WEF) द्वारा जारी की गई ग्लोबल जेंडर गैप रिपोर्ट 2026 में यह स्पष्ट हुआ है कि भारत इस क्षेत्र में काफी पीछे है। रिपोर्ट के अनुसार, भारत 145 देशों में 131वें स्थान पर है। 2025 में भारत का स्कोर 64.1% था, जो अब 2026 में बढ़कर 64.5% हो गया है। हालांकि, यह सुधार धीमी गति से हो रहा है, और यदि यह रफ्तार बनी रही, तो इस गैप को भरने में 120 साल से अधिक का समय लग सकता है।


महिलाओं की स्थिति: शिक्षा और स्वास्थ्य में सुधार

रिपोर्ट में बताया गया है कि शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में स्थिति में सुधार हुआ है, लेकिन नौकरी, व्यवसाय, राजनीति, नेतृत्व और तकनीकी क्षेत्रों में महिलाएं अभी भी पुरुषों से पीछे हैं। इस असमानता को कम करने के लिए महिलाओं को अधिक रोजगार के अवसर प्रदान करने, घर के बिना वेतन वाले कार्य का बोझ कम करने, उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने और डिजिटल संसाधनों तक उनकी पहुंच बढ़ाने की आवश्यकता है।


भारत में महिलाओं की श्रम भागीदारी

भारत में महिलाओं की श्रम बल भागीदारी लगभग 34% है, जबकि पुरुषों की यह दर करीब 77% है। इसका मतलब है कि कामकाजी उम्र की महिलाओं की तुलना में पुरुषों की नौकरी में भागीदारी अधिक है। इसके अलावा, समान काम के लिए वेतन समानता के मामले में भारत 120वें स्थान पर है। महिलाओं की औसत आय लगभग 5.03 हजार है, जबकि पुरुषों की औसत आय 14.32 हजार है। प्रोफेशनल और तकनीकी नौकरियों में महिलाओं की हिस्सेदारी लगभग 33.3% है, जबकि पुरुषों की 66.7% है।


राजनीतिक भागीदारी में कमी

राजनीतिक भागीदारी के मामले में भारत का स्कोर 24.5% है, और रैंक 67वीं है। संसद में महिलाओं की हिस्सेदारी केवल 13.84% है, जबकि पुरुषों की हिस्सेदारी 86.16% है। मंत्री पदों पर भी यही स्थिति है, जहां महिलाओं की हिस्सेदारी लगभग 5.56% और पुरुषों की 94.44% है।


शिक्षा में प्रगति

शिक्षा के क्षेत्र में भारत की महिलाएं बेहतर स्थिति में हैं। भारत का स्कोर 96.6% है और रैंक 112वीं है। प्राथमिक और माध्यमिक शिक्षा में लड़कियों और लड़कों के बीच का अंतर काफी कम है। माध्यमिक शिक्षा में महिलाओं की भागीदारी 78.29% और पुरुषों की 81.02% है।


स्वास्थ्य में समानता

स्वास्थ्य और जीवन प्रत्याशा के मामले में भारत का स्कोर 95.6% है। स्वस्थ जीवन प्रत्याशा में महिलाओं का आंकड़ा 57.97 साल और पुरुषों का 58.35 साल है। हालांकि, जन्म के समय लिंग अनुपात में अभी भी असमानता बनी हुई है।