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भारत में डिजिटल शिक्षा का विकास: चुनौतियाँ और सुधार

भारत में डिजिटल शिक्षा का विकास तेजी से हो रहा है, लेकिन कई चुनौतियाँ भी सामने आ रही हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा शुरू किया गया 'डिजिटल इंडिया' अभियान शिक्षा, रोजगार और सशक्तिकरण को बढ़ावा देने का प्रयास है। हाल के आंकड़ों के अनुसार, स्कूलों में कंप्यूटर और इंटरनेट की उपलब्धता में सुधार हुआ है, लेकिन एक तिहाई स्कूल अभी भी इन सुविधाओं से वंचित हैं। कुछ राज्य बेहतर प्रदर्शन कर रहे हैं, जबकि अन्य पीछे रह गए हैं। नीति आयोग की रिपोर्ट में शिक्षा प्रणाली में असमानता और डिजिटल सुविधाओं की कमी को प्रमुख चुनौती बताया गया है।
 

डिजिटल इंडिया की शुरुआत

भारत तेजी से डिजिटल परिवर्तन की ओर अग्रसर है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 1 जुलाई 2015 को 'डिजिटल इंडिया' पहल की शुरुआत की थी। इस महत्वाकांक्षी परियोजना का उद्घाटन इंदिरा गांधी इनडोर स्टेडियम, नई दिल्ली में 'डिजिटल इंडिया वीक' के दौरान हुआ था। इस अभियान का उद्देश्य भारत को डिजिटल रूप से सशक्त बनाना था, जिसमें ऑनलाइन सरकारी सेवाओं, ब्रॉडबैंड कनेक्टिविटी, डिजीलॉकर और डिजिटल भुगतान पर जोर दिया गया। इसके साथ ही, स्कूलों में भी महत्वपूर्ण बदलाव लाने का वादा किया गया था.


डिजिटल शिक्षा का उद्देश्य

प्रधानमंत्री मोदी ने स्पष्ट किया था कि डिजिटल इंडिया का लक्ष्य केवल तकनीक का प्रसार नहीं है, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि शिक्षा, रोजगार और सशक्तिकरण देश के हर बच्चे तक पहुंचे। क्या यह संभव हो पाया? इसका उत्तर मिश्रित है। पिछले एक दशक में, भारत के स्कूलों में कंप्यूटर, इंटरनेट और स्मार्ट क्लासरूम की उपलब्धता में काफी सुधार हुआ है। हालांकि, अभी भी कई क्षेत्रों में सुधार की आवश्यकता है.


राज्यवार कंप्यूटर सुविधाओं का विश्लेषण

यूनिफाइड डिस्ट्रिक्ट इंफॉर्मेशन सिस्टम ऑफ एजुकेशन (UDISE+) के आंकड़ों के अनुसार, 2014-15 में केवल 26.42 प्रतिशत स्कूलों में कार्यशील कंप्यूटर थे, जो 2024-25 में बढ़कर 64.7 प्रतिशत हो गए हैं। प्रारंभिक वर्षों में वृद्धि धीमी रही, लेकिन 2020-21 में 41.2 प्रतिशत की वृद्धि के बाद स्थिति में सुधार हुआ है। कुछ राज्य डिजिटल शिक्षा में आगे बढ़े हैं, जबकि अन्य पीछे रह गए हैं.


कंप्यूटर सुविधाओं में सुधार

कुछ राज्य और केंद्र शासित प्रदेश कंप्यूटर सुविधाओं में बेहतर प्रदर्शन कर रहे हैं। लक्षद्वीप में 100 प्रतिशत स्कूलों में कंप्यूटर हैं, जबकि दिल्ली में 99.9 प्रतिशत, पुडुचेरी में 99.5 प्रतिशत, चंडीगढ़ में 99.5 प्रतिशत, केरल में 99.5 प्रतिशत और पंजाब में 99 प्रतिशत स्कूलों में कंप्यूटर की सुविधा है।


पिछड़े राज्य

  • मेघालय: 19.7%
  • पश्चिम बंगाल: 25.1%
  • बिहार: 25.2%
  • मणिपुर: 38%
  • जम्मू-कश्मीर: 43.1%
  • अरुणाचल प्रदेश: 47.7%


सुधार की दिशा में कदम

पिछले दशक में असम में सबसे अधिक सुधार देखा गया है। पहले केवल 9.8 प्रतिशत स्कूलों में कंप्यूटर थे, अब यह आंकड़ा 78.7 प्रतिशत हो गया है। झारखंड में भी सुधार हुआ है, जहां 9.7 प्रतिशत से 76 प्रतिशत स्कूल कंप्यूटर युक्त हो गए हैं। ओडिशा में यह आंकड़ा 13.7 प्रतिशत से बढ़कर 76.7 प्रतिशत हो गया है।


चिंताजनक स्थिति

हालांकि, एक तिहाई से अधिक स्कूल अभी भी कंप्यूटर से वंचित हैं और राज्यों के बीच बड़ा अंतर बना हुआ है। 2014-15 में केवल 8.05 प्रतिशत स्कूलों में इंटरनेट था, जो 2024-25 में बढ़कर 63.5 प्रतिशत हो गया है।


डिजिटल डिटॉक्स की समस्या

देश का एक बड़ा हिस्सा, जो कंप्यूटर और स्मार्टफोन पर निर्भर है, डिजिटल डिटॉक्स का सामना कर रहा है। यह स्थिति उन स्कूलों के लिए और भी चिंताजनक है, जहां सुविधाएं ही नहीं हैं। नीति आयोग के अनुसार, पश्चिम बंगाल में केवल 18.6 प्रतिशत स्कूल इंटरनेट से जुड़े हैं।


स्कूलों की चुनौतियाँ

नीति आयोग की रिपोर्ट में शिक्षा प्रणाली में असमानता को एक प्रमुख चुनौती बताया गया है। आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों और ग्रामीण क्षेत्रों में बच्चों को समान अवसर नहीं मिल पा रहे हैं।


भविष्य की दिशा

नीति आयोग ने अपनी रिपोर्ट में 33 सिफारिशें की हैं, जिनमें 'कंपोजिट स्कूल' और 'स्कूल कॉम्प्लेक्स' मॉडल शामिल हैं। इसका उद्देश्य छोटे स्कूलों को संसाधनों के स्तर पर जोड़ना है, ताकि शिक्षा की गुणवत्ता और प्रशासनिक दक्षता में सुधार हो सके।