भारत में तेल आपूर्ति की स्थिति: रूस, अमेरिका और अफ्रीका से बढ़ती खरीदारी
तेल की आपूर्ति और भंडारण की स्थिति
तेल का मामला गैस से भिन्न है, क्योंकि इसके भंडारण की व्यवस्था अपेक्षाकृत बेहतर है। यही कारण है कि भारत में तेल की सप्लाई को लेकर सकारात्मकता दिखाई दे रही है। वास्तव में, अमेरिका ने रूस से तेल खरीदने की अनुमति देकर भारत को एक महत्वपूर्ण अवसर प्रदान किया। इसके साथ ही, कई तेल टैंकर जो रूस से तेल लेकर समुद्र में खड़े थे, उन्हें खरीदकर भारत लाया गया। इसके अलावा, अमेरिका से तेल की खरीद में भी वृद्धि हुई है। वर्तमान में, भारत के तेल आयात में रूस का हिस्सा 30 से 33 प्रतिशत और अमेरिका का हिस्सा 10 प्रतिशत तक पहुंचने वाला है। इसके साथ ही, भारत ने अफ्रीका से भी तेल खरीदना शुरू कर दिया है। इन देशों से तेल खरीदने का एक लाभ यह है कि इनके टैंकर होर्मुज की खाड़ी से नहीं गुजरेंगे, जिससे खरीद में विविधता लाने का प्रयास किया जा रहा है.
भारत का रणनीतिक रिजर्व
जब तक इन देशों से तेल की खरीद और आपूर्ति स्थिर रहती है, तब तक सरकार रूस के तेल और खाड़ी से आने वाले कुछ टैंकरों के अलावा अपने रणनीतिक रिजर्व पर निर्भर है। भारत का रणनीतिक रिजर्व 3.4 मिलियन टन है, जबकि इसकी कुल क्षमता 5.3 मिलियन टन है। इसका मतलब है कि भारत का रिजर्व अपनी क्षमता के मुकाबले केवल 64 प्रतिशत भरा हुआ है, जिससे लगभग एक तिहाई रिजर्व खाली है। निश्चित रूप से, घरेलू आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए इसका उपयोग किया गया होगा। भारत में आमतौर पर 60 दिनों का रिजर्व होने की बात कही जाती है, जिसमें कच्चा तेल, तैयार उत्पाद और रणनीतिक रिजर्व शामिल हैं।
होर्मुज की खाड़ी की स्थिति
भारत में यह चर्चा भी रही है कि होर्मुज की खाड़ी बंद होने के बावजूद भारतीय जहाजों को अनुमति मिल रही है, लेकिन यह सच नहीं है। युद्ध से पहले, भारत के 22 जहाज होर्मुज की खाड़ी में फंसे हुए थे, और अब भी कम से कम 14 जहाज और सैकड़ों नाविक उस क्षेत्र में फंसे हुए हैं। पहले, होर्मुज की खाड़ी से हर दिन 150 से 160 जहाज गुजरते थे, लेकिन अब यह संख्या घटकर औसतन 10 या 12 रह गई है। भारत का 40 प्रतिशत कच्चा तेल और उससे अधिक गैस इस क्षेत्र से गुजरती है। चूंकि भारत के पास कोई तेल या गैस पाइपलाइन नहीं है, इसलिए सभी तेल टैंकर के माध्यम से ही आते हैं। इसलिए, जब तक होर्मुज की खाड़ी खुलती नहीं है, तब तक आपूर्ति सामान्य नहीं हो सकती।