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भारत में धर्मांतरण के लिए करोड़ों रुपये का जाल उजागर

भारत की जांच एजेंसी ने धर्मांतरण के लिए करोड़ों रुपये के अवैध निकासी के एक बड़े जाल का पर्दाफाश किया है। CBI ने अमेरिका की एक संस्था और उसके भारतीय सहयोगियों के खिलाफ मामला दर्ज किया है। जांच में पता चला है कि बिना किसी विदेशी अंशदान रजिस्ट्रेशन के, एटीएम के जरिए करोड़ों रुपये निकाले गए हैं। इस धन का उपयोग गरीबों को बहलाने और नक्सलवाद से जुड़ी गतिविधियों के लिए किया जा रहा था। जानें इस मामले की पूरी जानकारी और इसके पीछे के प्रमुख आरोपियों के बारे में।
 

धर्मांतरण के लिए चल रहा जाल

भारत की जांच एजेंसी ने एक महत्वपूर्ण खुलासा किया है, जिसमें देश में चल रहे धर्मांतरण के एक बड़े नेटवर्क का पर्दाफाश हुआ है। केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने अमेरिका की एक संस्था और भारत में उसके लिए काम कर रहे छह व्यक्तियों के खिलाफ मामला दर्ज किया है। आरोप है कि इस संस्था ने अवैध तरीके से करोड़ों रुपये की नकदी निकाली है। जांच एजेंसियों का कहना है कि बिना किसी विदेशी अंशदान (FCRA) रजिस्ट्रेशन के भारत के विभिन्न राज्यों में एटीएम के माध्यम से लगभग 92.55 करोड़ रुपये निकाले गए हैं.


धन का उपयोग धर्म प्रचार और नक्सलवाद में

इन धनराशियों का उपयोग गरीब लोगों को बहलाने-फुसलाने और धर्म प्रचार तथा नक्सलवाद से संबंधित गतिविधियों के लिए किया जा रहा था। यह मामला तब शुरू हुआ जब प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने अप्रैल में बेंगलुरु एयरपोर्ट पर मीका मार्क नामक व्यक्ति को गिरफ्तार किया। उसके पास से कई ऐसे दस्तावेज मिले, जिन्होंने जांच एजेंसियों के संदेह को और बढ़ा दिया.


मीका के पास से मिले एटीएम कार्ड

मीका के पास अमेरिका के 'ट्रूइस्ट बैंक' के 24 एटीएम कार्ड पाए गए। इनमें से कई कार्डों पर 'संतोष कुमार' नाम लिखा हुआ था, ताकि किसी को संदेह न हो। पूछताछ में यह सामने आया कि यह नेटवर्क अब तक भारत में 1,000 से अधिक अमेरिकी एटीएम कार्ड वितरित कर चुका है। बेंगलुरु, छत्तीसगढ़, असम और कर्नाटक जैसे कई स्थानों से लगातार नकदी निकाली जा रही थी.


संस्था और उसके प्रमुख पर आरोप

द टिमोथी इनिशिएटिव, जो अमेरिका के नॉर्थ कैरोलिना में स्थित है, पर आरोप है कि इसका उद्देश्य हर गांव में अपने केंद्र स्थापित करना है। इस संस्था का प्रमुख जोनाथन एस राजन है, जो एटीएम से निकाले गए धन को देशभर में विभिन्न कार्यों में बांटता था.


शेल कंपनियों के जरिए धन का प्रबंधन

अजीत वर्गीज मथाई का नाम भी इस मामले में सामने आया है। वह बेंगलुरु से अपनी शेल कंपनियों के माध्यम से धन का प्रबंधन करता था। ED ने उसके ठिकानों से 37 लाख रुपये की नकदी भी जब्त की। मीका मार्क इन सभी के लिए काम करता था, जो बार-बार विदेश यात्रा करके अमेरिका से एटीएम कार्ड भारत लाता था.


छापेमारी के दौरान सबूतों का नष्ट होना

ED की रिपोर्ट के अनुसार, जब एजेंसियों ने अप्रैल में इनके ठिकानों पर छापेमारी की, तो अमेरिका में बैठे इनके सहयोगियों ने इंटरनेट के माध्यम से भारत से संबंधित सभी डेटा और वेबसाइट्स को बंद कर दिया। यहां तक कि जब्त किए गए लैपटॉप का डेटा भी दूर से रिमोट एक्सेस के जरिए पूरी तरह से डिलीट कर दिया गया.


सीबीआई की कार्रवाई

मामले की गंभीरता को देखते हुए ED ने गृह मंत्रालय को पत्र लिखा, जिसके बाद गृह मंत्रालय के निर्देश पर CBI ने 27 अगस्त को FIR दर्ज कर आगे की कानूनी कार्रवाई शुरू की.