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भारत में नई यूरिया निवेश नीति: उत्पादन क्षमता में वृद्धि की योजना

केंद्र सरकार ने देश में बढ़ती यूरिया मांग को पूरा करने के लिए नई राष्ट्रीय यूरिया निवेश नीति को मंजूरी दी है। इस नीति के तहत 8 से 9 नए गैस आधारित संयंत्र स्थापित किए जाएंगे, जिससे लगभग एक करोड़ टन अतिरिक्त उत्पादन क्षमता विकसित होगी। यह कदम किसानों को दीर्घकालिक लाभ देने, उर्वरक क्षेत्र में निवेश बढ़ाने और भारत को यूरिया उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण है। नई नीति में निवेशकों के लिए कई सुविधाएँ और पारदर्शिता का प्रावधान किया गया है, जिससे रोजगार के नए अवसर भी उत्पन्न होंगे।
 

नई दिल्ली में यूरिया निवेश नीति की मंजूरी


नई दिल्ली: देश में यूरिया की बढ़ती मांग और आयात पर निर्भरता को कम करने के लिए, केंद्र सरकार ने एक नई राष्ट्रीय यूरिया निवेश नीति को स्वीकृति दी है। इस नीति के तहत 8 से 9 नए गैस आधारित यूरिया संयंत्र स्थापित किए जाएंगे, जिससे लगभग एक करोड़ टन अतिरिक्त उत्पादन क्षमता विकसित होगी। सरकार का मानना है कि इससे किसानों को दीर्घकालिक लाभ होगा, उर्वरक क्षेत्र में निवेश में वृद्धि होगी, और भारत यूरिया उत्पादन में आत्मनिर्भरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाएगा।


यूरिया उत्पादन में वृद्धि के लिए नई नीति

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने यूरिया उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए नई राष्ट्रीय निवेश नीति को मंजूरी दी है। सरकार का उद्देश्य देश में 8 से 9 आधुनिक गैस आधारित संयंत्रों की स्थापना करना है, जिससे लगभग एक करोड़ टन अतिरिक्त उत्पादन क्षमता प्राप्त होगी। इस नई नीति में सरकारी, निजी और सहकारी क्षेत्रों को निवेश के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा।


बढ़ती मांग को पूरा करने की दिशा में कदम

केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि खेती के विस्तार और फसल उत्पादन में वृद्धि के कारण यूरिया की मांग में लगातार वृद्धि हो रही है। वर्तमान में देश में लगभग चार करोड़ टन यूरिया की आवश्यकता है, जबकि घरेलू उत्पादन लगभग तीन करोड़ टन है। शेष आवश्यकता आयात के माध्यम से पूरी की जाती है।


पुरानी नीति का नया स्वरूप

नई निवेश नीति, वर्ष 2012 की नीति का विस्तारित रूप है। पिछली नीति के तहत छह नए यूरिया संयंत्र स्थापित किए गए थे, जिससे घरेलू उत्पादन में वृद्धि हुई। वर्ष 2019 में उस नीति की अवधि समाप्त होने के बाद, उर्वरक विभाग को कई नए प्रस्ताव प्राप्त हुए, जिनके आधार पर नई नीति तैयार की गई।


निवेशकों के लिए नई सुविधाएँ

नई नीति में निवेशकों के लिए कई महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं। फिक्स्ड और वेरिएबल लागत को अलग रखा जाएगा, जिससे लागत और सब्सिडी का आकलन अधिक पारदर्शी हो सके। इसके अलावा, निवेश पर न्यूनतम 12 प्रतिशत और अधिकतम 16 प्रतिशत रिटर्न ऑन इक्विटी का प्रावधान किया गया है, जिससे नए निवेश को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।


आयात में कमी और रोजगार सृजन पर ध्यान

सरकार का मानना है कि नए संयंत्रों के शुरू होने के बाद आयात पर निर्भरता काफी कम होगी। गैस आधारित आधुनिक तकनीक से उत्पादन अधिक ऊर्जा दक्ष और पर्यावरण के अनुकूल होगा। विदेशी मुद्रा के उतार-चढ़ाव का प्रभाव भी सीमित करने की व्यवस्था की गई है। इसके अतिरिक्त, प्रत्येक परियोजना में लागत बचत से निवेशकों का विश्वास बढ़ेगा और नए रोजगार के अवसर भी उत्पन्न होंगे।