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भारत में पेट्रोल-डीजल की संभावित किल्लत: क्या है स्थिति?

पश्चिम एशिया में चल रहे युद्ध के कारण भारत में पेट्रोल और डीजल की किल्लत की संभावना बढ़ गई है। सरकारी सूत्रों के अनुसार, देश के पास केवल 25 दिनों का कच्चा तेल बचा है। कांग्रेस ने सरकार पर सवाल उठाते हुए कहा है कि पहले 74 दिनों का रिजर्व बताया गया था, लेकिन अब स्थिति बदल गई है। जानें इस संकट का क्या असर होगा और सरकार की क्या प्रतिक्रिया है।
 

पश्चिम एशिया में युद्ध का प्रभाव


पश्चिम एशिया में युद्ध का कच्चे तेल की सप्लाई पर प्रभाव


अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर लगातार हमले हो रहे हैं, जिसके परिणामस्वरूप ईरान भी अन्य देशों को निशाना बना रहा है। इस स्थिति ने पश्चिम एशिया में तनाव और युद्ध की स्थिति उत्पन्न कर दी है। इस संघर्ष का सबसे बड़ा प्रभाव यह है कि ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को बंद करने की चेतावनी दी है।


यह मार्ग विश्व सप्लाई चेन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, और इसके बंद होने से कच्चे तेल की आपूर्ति पर गंभीर असर पड़ा है। भारत, जो अपनी आवश्यकताओं के लिए पूरी तरह से आयात पर निर्भर है, इस संकट से अछूता नहीं है।


भारत में तेल का स्टॉक

सरकारी सूत्रों से मिली जानकारी


कुछ सरकारी सूत्रों के अनुसार, भारत के पास केवल 25 दिनों का कच्चा तेल और रिफाइंड ऑयल का स्टॉक बचा है। अमेरिका ने ईरान में लंबी लड़ाई के लिए अपनी तैयारी की घोषणा की है, जिससे आने वाले दिनों में पेट्रोल और डीजल की कमी की संभावना बढ़ गई है।


इस जानकारी के सामने आने के बाद, प्रमुख विपक्षी पार्टी ने सरकार पर तीखा हमला किया है। कांग्रेस ने सरकार से सवाल किया है कि हमारा तेल किसने चुराया। उन्होंने यह भी कहा कि 9 फरवरी को केंद्रीय मंत्री ने बताया था कि हमारे पास 74 दिनों का पेट्रोलियम रिजर्व है, लेकिन अब केवल 25 दिन का स्टॉक बचा है।