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भारत में प्रदूषण: विकास या अव्यवस्था का परिणाम?

भारत में प्रदूषण की समस्या एक गंभीर विषय बन चुकी है। यह न केवल विकास का परिणाम है, बल्कि अव्यवस्था का भी मुख्य उत्पाद है। इस लेख में हम जानेंगे कि कैसे सफाई व्यवस्था और ट्रैफिक प्रबंधन में सुधार करके प्रदूषण को कम किया जा सकता है। विशेष रूप से बिहार जैसे शहरों में प्रदूषण के कारणों और इसके समाधान पर चर्चा की जाएगी। क्या भारत इस समस्या से निजात पा सकेगा? जानने के लिए पूरा लेख पढ़ें।
 

प्रदूषण की समस्या का विश्लेषण

एक पुरानी कहावत है, 'खाया पिया कुछ नहीं गिलास फोड़ा बारह आना।' भारत में प्रदूषण की स्थिति भी कुछ ऐसी ही है। लंदन से लेकर बीजिंग तक, कई देशों की राजधानियों में प्रदूषण का संकट एक समय था, लेकिन यह औद्योगिक विकास का परिणाम था। लंदन में प्रदूषण की समस्या पहली औद्योगिक क्रांति के दौरान उत्पन्न हुई, लेकिन बाद में उन शहरों ने इसे नियंत्रित कर लिया। इसके विपरीत, भारत में औद्योगिकीकरण की कमी के बावजूद प्रदूषण तेजी से बढ़ रहा है। यदि भारत औद्योगिक विकास की राह पर होता, तो प्रदूषण को समझा जा सकता था। यह माना जाता है कि देश के विकास के कारण प्रदूषण बढ़ रहा है, जिससे यह विश्वास होता है कि एक दिन भारत इस समस्या से मुक्त हो जाएगा।


अव्यवस्था का मुख्य उत्पाद

हालांकि, भारत में प्रदूषण का मुख्य कारण विकास नहीं, बल्कि अव्यवस्था है। यदि देश में सफाई व्यवस्था को सही तरीके से लागू किया जाए, तो प्रदूषण की समस्या में 20 प्रतिशत की कमी आ सकती है। इसके लिए सड़कों की सफाई और कचरा उठाने की व्यवस्था को मजबूत करना होगा, लेकिन यह भी नहीं हो पा रहा है। स्थानीय प्राधिकरण सफाई का कार्य नहीं कर पा रहे हैं और अनियमित निर्माण को बढ़ावा दे रहे हैं। योजनाबद्ध शहरों की संख्या बहुत कम है, जबकि अधिकांश गांवों और कस्बों में अव्यवस्थित निर्माण हो रहा है।


गाड़ियों का बढ़ता योगदान

हाल ही में केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने स्वीकार किया कि प्रदूषण में गाड़ियों का बड़ा योगदान है। सरकार इलेक्ट्रिक वाहनों पर सब्सिडी दे रही है, लेकिन पेट्रोल और डीजल की गाड़ियाँ अधिक सस्ती हैं, जिससे लोग उन्हें खरीदना पसंद कर रहे हैं। इस कारण दोनों प्रकार की गाड़ियों की संख्या बढ़ रही है। सर्दियों में ट्रैफिक प्रबंधन की कमी के कारण प्रदूषण बढ़ता जा रहा है।


बिहार के शहरों में प्रदूषण

दिल्ली और मुंबई जैसे महानगरों में प्रदूषण की समस्या समझ में आती है, लेकिन बिहार के बेगूसराय और मुजफ्फरपुर जैसे शहरों में प्रदूषण का कोई स्पष्ट कारण नहीं है। ये शहर हर साल सबसे प्रदूषित शहरों की सूची में शामिल होते हैं। सरकार छोटे शहरों के विकास की बात करती है, लेकिन इसके परिणामस्वरूप केवल ट्रैफिक और प्रदूषण बढ़ता है। बिहार में औसत वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) तीन सौ से ऊपर रहता है, और सरकार ने इस समस्या का कोई समाधान नहीं बताया है।