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भारत में बाढ़ और भूजल संकट: सरकार की योजनाएं और चुनौतियां

भारत के विभिन्न राज्यों में बाढ़ और भूजल संकट की गंभीर स्थिति उत्पन्न हो गई है, विशेषकर असम में। इस लेख में, हम जानेंगे कि सरकार ने भूजल स्तर की गिरावट को रोकने के लिए क्या कदम उठाए हैं। जल शक्ति मंत्रालय द्वारा उठाए गए विभिन्न प्रोजेक्ट्स और योजनाओं के माध्यम से जल संरक्षण की दिशा में क्या प्रयास किए जा रहे हैं। जानें कि कितने जिले खतरे में हैं और सरकार की क्या योजनाएं हैं।
 

देशभर में बाढ़ का संकट

उत्तर और दक्षिण भारत के साथ-साथ पूर्वोत्तर के कई राज्यों में भारी बारिश और बाढ़ की स्थिति उत्पन्न हो गई है। असम सबसे अधिक प्रभावित राज्य है, जहां बाढ़ के कारण 60 से अधिक लोगों की जान जा चुकी है और हजारों एकड़ फसलें बर्बाद हो गई हैं। उत्तर भारत, महाराष्ट्र और उत्तराखंड जैसे राज्यों में भी बारिश के कारण स्थिति गंभीर है। हर साल भारी बारिश होती है, लेकिन भारत की जल भंडारण क्षमता लगातार घटती जा रही है। बारिश के पानी का 60 प्रतिशत हिस्सा भी हम जमीन तक नहीं पहुंचा पा रहे हैं या जलाशयों में संग्रहित नहीं कर पा रहे हैं।


भूजल स्तर की गिरावट पर चिंता

जल शक्ति मंत्रालय के तहत समाजवादी पार्टी के सांसद जियाउर रहमान ने संसद में सवाल उठाया कि क्या सरकार ने देश में गिरते भूजल स्तर का आकलन किया है। उन्होंने यह भी पूछा कि क्या 'वाटर रिचार्ज' की कोई योजना बनाई गई है। सरकार के उत्तर ने चिंता को और बढ़ा दिया है, क्योंकि कई क्षेत्रों में भूजल स्तर तेजी से गिर रहा है।


भूजल रिचार्ज की स्थिति

केंद्र सरकार ने लोकसभा में बताया कि भूजल संसाधनों का आकलन हर साल किया जाता है। केंद्रीय भूजल बोर्ड (CGWB) की रिपोर्ट के अनुसार, 2025 के आंकड़ों में देश में कुल सालाना भूजल रिचार्ज 448.52 बिलियन क्यूबिक मीटर (BCM) है। इसमें से 407.75 BCM निकालने योग्य है, जबकि लगभग 247.22 BCM पानी निकाला जा रहा है। देश का औसत भूजल दोहन स्तर 60.63% है।


खतरे में जिले

केंद्रीय भूजल बोर्ड के अनुसार, देशभर में 6,762 तालुकों में से 730 तालुके ऐसे हैं, जहां पानी का अत्यधिक दोहन हो रहा है। यह कुल का लगभग 10.8 प्रतिशत है। 201 इलाके बेहद संवेदनशील हैं, जबकि 758 ऐसे हैं जहां स्थिति तनावपूर्ण है। अन्य क्षेत्रों में जल स्तर सुरक्षित है।


सरकार की पहल

भूजल प्रबंधन मुख्य रूप से राज्य सरकारों की जिम्मेदारी है, लेकिन केंद्र कई योजनाओं के माध्यम से सहायता प्रदान कर रहा है।



  • NAQUIM प्रोजेक्ट: यह राष्ट्रीय एक्वीफायर मैपिंग और प्रबंधन कार्यक्रम है, जिसके तहत देश के बड़े हिस्से का भूजल मैपिंग किया गया है। NAQUIM 2.0 के तहत पानी की समस्या वाले जिलों पर ध्यान केंद्रित किया जा रहा है।

  • JSA प्रोजेक्ट: जल शक्ति अभियान के तहत हर साल पानी संरक्षण और ग्राउंड रिचार्ज के कार्य किए जा रहे हैं। अब तक 2 करोड़ से अधिक लक्ष्य पूरे किए जा चुके हैं।

  • जल संचय जन भागीदारी: यह मुहिम लोगों को बारिश का पानी बचाने के लिए प्रेरित कर रही है, जिसके तहत 1.55 करोड़ से अधिक तालाब और अन्य संरचनाएं बनाई गई हैं।


सरकार का दावा है कि 7 राज्यों के 80 जिलों में, मिशन अमृत सरोवर, AMRUT 2.0, PMKSY और माइक्रो-इरिगेशन जैसी योजनाएं भूजल संरक्षण में मदद कर रही हैं। इन सभी योजनाओं का उद्देश्य यह है कि पानी की कमी से जूझ रहे जिलों में बारिश का पानी बचाकर उसे जमीन में उतारा जाए ताकि भूजल स्तर में सुधार हो सके।